इंदौर, दलित परिवार ने अपने बेटे की बारात निकाली तो गांव वालों ने उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया। बकायदा इसको लेकर गांव में पंचायत बैठी और फरमान जारी किया गया। इसको लेकर दलित समाज में आक्रोश बढ़ रहा है जिसकी आग इंदौर तक पहुंच गई। प्रशासन को ज्ञापन देकर न्याय मांगा जाएगा, नहीं तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
14 मई को उज्जैन जिले के गांव कुंडीखेड़ा में पहली बार रविदास समाज के एक युवक की बारात निकाली गई। उसके अगले ही दिन सुबह 9.30 बजे सरकारी रामकृष्ण मंदिर पर गांव की एक बैठक बुलाई गई जिसके बाद बकायदा फरमान जारी किया गया कि रविदास समाज का हुक्का-पानी बंद किया जाता है। उनसे कोई भी व्यवहार नहीं करेगा। किसी ने ऐसा किया तो उस पर हजार रूपए जुर्माना होगा। उसके बाद से कोई किराने वाला सामान नहीं दे रहा है तो न डेरी वाला दूध बेच रहा है न खरीद रहा है। यहां तक कि पानी भी भरने नहीं दिया जा रहा है। हालत ये है कि 4 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। तो मवेशियों को दूर रिश्तेदार के यहां छोड़ना पड़ा। आटा पिसाने के लिए 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए दूल्हे के मामा दुलेसिंह सूर्यवंशी ने अखिल भारतीय बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज परमार से संपर्क किया जिस पर टीम कल मौके पर पहुंची। कल महासंघ ने उज्जैन पुलिस व प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। कहना है कि 24घंटे में हुक्का-पानी चालू कराया जाए नहीं तो दलित समाज को मजबूरी में आंदोलन करना पड़ेगा। इसको लेकर इंदौर में एक बैठक होने जा रही है जिसमें आंदोलन की रणनीति बनाई जाने वाली है।
दलित परिवार ने बेटे की बारात निकाली तो पंचायत ने गांव में हुक्कापानी बंद करने का फरमान दिया