उज्जैन, श्रावण के अन्तिम सोमवार पर भगवान महाकालेश्वर की सवारी परम्परा अनुसार पूर्ण वैभव से निकाली गई। पालकी में मनमहेश के रूप में तथा हाथी पर चंद्रमौलेश्वर के स्वरूप में विराजित भगवान शिव नगर भ्रमण पर निकले। भगवान महाकालेश्वर की सवारी कोरोना संक्रमण के मद्देनजर परिवर्तित मार्ग से निकाली गई। महाकालेश्वर मन्दिर से सवारी हरसिद्धि मन्दिर के सामने से होकर नृसिंह घाट के निकट झालरिया मठ से होती हुई रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान महाकालेश्वर का मां शिप्रा के पवित्र जल से विधिवत पूजन-अर्चन किया गया एवं आरती की गई। शिप्रा तट पर मां शिप्रा को महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति की ओर से चुनरी ओढ़ाई गई। सवारी परिवर्तित मार्ग से होती हुई हरसिद्धि मन्दिर मार्ग पहुंची। हरसिद्धि मन्दिर आगमन पर मन्दिर के पुजारियों द्वारा भगवान महाकालेश्वर की आरती की गई। यहां से भगवान महाकाल की सवारी पुन: महाकालेश्वर मन्दिर पहुंची। इसके पूर्व सभामंडप में पूजन-अर्चन शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा द्वारा संपन्न कराया गया। सर्वप्रथम भगवान महाकालेश्वर का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात भगवान की आरती की गई।
मनमहेश पालकी में चंद्रमौलेश्वर हाथी पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले महाकाल