नई आबकारी नीति में बदलाव के आसार, आएगा ई-टेंडर, रिन्यू नहीं होंगी शराब की दुकानें

भोपाल,आम बजट में मध्यप्रदेश का कोटा कम किए जाने के बाद सरकार की आर्थिक दिक्कतें और बढ़ गई हैं। प्रदेश सरकार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। अब सरकार ने आय बढ़ाने शराब की दुकानों को जरिया बनाया है। कहा जा रहा है कि केंद्र की तरफ से राहत न मिलने के कारण सरकार अपने पास उपलध संसाधनों से अधिक से अधिक राजस्व जुटाने के प्रयास कर रही है। यही वजह है कि आबकारी विभाग से अधिकतम राजस्व जुटाने के लिए नई आबकारी नीति में शराब दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया में संशोधन किया गया है। इससे पहले तक पिछले साल के अपसेट प्राइस से 15 प्रतिशत राशि बढ़ाकर शराब दुकान रिन्यू कर दी जाती थीं। अधिकतर शराब ठेकेदार 15 प्रतिशत ज्यादा राशि देकर दुकानें रिन्यू करा लेते थे। इससे सरकार के राजस्व में अधिकतम 15 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हो पाती थी। लेकिन अब अपसेट प्राइस में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने और उसके बाद बोली लगाए जाने की प्रक्रिया से सरकार के राजस्व में अच्छी खासी बढ़ोतरी के आसार हैं।
नीलामी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
राज्य सरकार इस साल नई आबकारी नीति में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसका मकसद राजस्व में बढ़ोतरी करना है। इस साल शराब ठेकेदार शराब दुकानों को रिन्यू नहीं करा पाएंगे। इस बार शराब दुकानों की नीलामी के लिए ई-टेंडर निकाले जाएंगे। टेंडर खोलने के बाद एक बार फिर निविदाकर्ताओं को नीलामी की राशि बढ़ाने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद शराब ठेकों की नीलामी शुरू की जाएगी और सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को शराब की दुकान आवंटित कर दी जाएगी। पिछले साल के मुकाबले इस बार शराब दुकानों की अपसेट प्राइस 20 से 25 प्रतिशत ज्यादा रखी जाएगी।
4 हजार करोड़ अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद
आबकारी विभाग के सूत्रों का कहना है कि शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में बदलाव से सरकार को 4 हजार करोड़ अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। प्रदेश में शराब की करीब 3600 दुकानें हैं। इनमें 1060 विदेशी शराब दुकानें और करीब 2544 देसी शराब दुकानें हैं। वाणिज्यिक कर विभाग के प्रस्ताव को मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ने अनुमोदन कर दिया है। अब प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाएगा। विा विभाग की अनुमति के बाद मुयसचिव के माध्यम से प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा। शराब दुकानों की अपसेट प्राइस 25 प्रतिशत बढ़ाए जाने का सीधा असर शराब की कीमतों पर पड़ेगा। प्रदेश में शराब और महंगी हो जाएगी। वर्तमान में देश में मप्र में शराब सबसे महंगी है। सरकार इससे पहले राज्य सरकार प्रदेश में शराब की उप दुकानें खोलने का फैसला कर चुकी है। उप दुकान खोलने के लिए शराब दुकान संचालक को सालाना शराब ठेके के अतिरिक्त राशि देना होगी। शहरी क्षेत्र में 5 किलोमीटर की परिधि में शराब की दुकान नहीं होने पर, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 10 किलोमीटर की परिधि में शराब दुकान नहीं होने पर उप दुकान खोलने की मंजूरी दी जाएगी। शराब दुकान के लायसेंस शुल्क के आधार पर उप दुकानों के अतिरिक्त शुल्क का स्लैब तैयार किया गया है। इस फैसले से प्रदेश में करीब 500 उप दुकानें खुलने का अनुमान है।

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