भोपाल,प्रदेश मे 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस एक बार फिर व्यापमं मामले में नये सिरे से जांच कराना चाहती है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार इस संबंध में एक समिति भी गठित कर रही है, यह समिति बीती सरकार में हुए घोटालों की जांच करेगी। इस समिति में गृह, शिक्षा, मेडिकल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कानून विभाग के अफसर शामिल रहेंगे। अंदरुनी सुत्रो के मुताबिक समिति का उद्देश्य यह देखना है, कि क्या किसी दोषी को निर्दोष छोड़ दिया गया है, या किसी निर्दोष के उपर गलत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसके साथ ही समिति यह भी जांच करेगी कि क्या कोई छात्र जिसके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं थी, उसे दंडित किया गया है। समिति उन छात्रों और उनके परिवार के सदस्यों का भी पता लगाएगी, जिनके खिलाफ बिना किसी साक्ष्य के जांच के नाम पर प्रकरण दर्ज किए गए थे। ऐसे मे सरकार उन मामलों पर भी कार्रवाई करेगी जिनकी दोबारा जांच की जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकार ने गृह विभाग से उन मामलों को फिर से खोलने के लिए कहा है, जो बंद हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार ऐसे करीब एक हजार से अधिक मामले हैं जिन्हें केंद्रीय एजेंसी ने अपनी जांच के दायरे से बाहर रखा है, अब सबूतों के अभाव में पुलिस द्वारा बंद किए गए कई मामले फिर से खुल जाएंगे। समिति के माध्यम से, सरकार माता-पिता को आरोपी बनाने के बजाय अनुमोदन करने के कुछ तरीकों का पता लगाना चाहती है, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके। समिति घोटाले में पकड़े गए छात्रों को बचाने के तरीके भी खोजेगी, क्योंकि सरकार छात्रों और उनके माता-पिता को कुछ राहत देते हुए दोषियो के खिलाफ कार्यवाही करना चाहती है। मीडीया रिर्पार्टस के अनुसार गृह मंत्री बाला बच्चन ने कहा है कि गृह मंत्रालय उन फर्जी मामलों की जांच कर रहा है, जो सीबीआई जांच के बाहर थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्दोषों के साथ न्याय किया जाएगा और दोषियों को दंडित किया जाएगा, साथ ही सरकार एक संवाददाता सम्मेलन में व्यापम के बारे में सब कुछ बताएगी।
व्यापम घोटाले में सीबीआई की जांच के दायरे से बाहर एक हजार से अधिक मामलो की जांच करायेगी मप्र सरकार