भोपाल, महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का नगर पालिक संशोधन अध्यादेश लागू हो गया है। कानून में महापौर की योग्यता को लेकर कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, इसलिए पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र भले ही 21 साल हो, लेकिन 25 साल से कम उम्र का पार्षद महापौर नहीं बन सकेगा। चुनाव के बाद पार्षद यदि संभागीय आयुक्त की अनुमति के बिना तीन महीने तक शपथ नहीं लेताा है तो उसका स्थान रिक्त मान लिया जाएगा। वहीं, यदि किसी वार्ड में किसी कारणवश पार्षद का चुनाव नहीं होता है तो छह महीने के अंदर वहां दोबारा चुनाव कराए जाएंगे।
नगर पालिक संशोधन अध्यादेश के जरिए कानून में महापौर निर्वाचन की प्रक्रिया में कई संशोधन किए गए हैं। कानून के तहत महापौर के चुनाव में यदि पार्षदों के वोट बराबर पड़ते हैं तो टॉस से फैसला होगा। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग को पंद्रह दिन के अंदर चुनाव परिणाम के 15 दिन के अंदर पार्षदों का सम्मेलन बुलाकर महापौर के चुनाव कराने होंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार ने नगर निगम में महापौर और नगर पालिका व नगर परिषद में अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे जनता से कराने की बजाय पार्षदों के जरिए कराने का फैसला किया था। भारी विरोध के बाद आखिरकार इसे राज्यपाल का अनुमोदन मिला और इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। वर्तमान में महापौर पद पर काबिज भाजपा के नेताओं ने अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर पद का चुनाव कराने जाने का भारी विरोध किया है उन्होंने राज्य सरकार के इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है।
महापौर की योग्यता में परिवर्तन नहीं, 25 साल से कम उम्र का पार्षद नहीं बनेगा महापौर