एमपी में अब पार्षद करेंगे महापौर,अध्यक्ष का चुनाव, 20 साल बाद फिर लौटी अप्रत्यक्ष प्रणाली

भोपाल, नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव अब सीधे न होकर अप्रत्यक्षण प्रणाली से होगा। चुनाव में जीतकर आए पार्षद अब महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष को चुनेंगे। बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इससे साफ हो गया है कि वर्ष 2020 में होने वाले चुनाव अब अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही संपन्न होंगे। गौरतलब है कि इससे पहले तक जनता सीधे महापौर और नगरपालिका, नगर पंचायत अध्यक्ष को चुनती थी। बैठक के बाद जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि परिसीमन का काम चुनाव से दो महीने पहले पूरा हो जाएगा। आपराधिक छवि वाले पार्षदों को दोषी पाए जाने पर 6 महीने की सजा के साथ ही 25 हजार के जुर्माने का प्रावधान को भी कैबिनेट ने मंजूर किया है।
विचार के बाद लागू होगा नया अधिनियम
मोटर परिवहन एक्ट में हेलमेट, बीमा और दूसरे कागजों के चलते जो जुर्माना बढ़ाया गया, विचार के बाद ही उसे लागू किया जाएगा।
पत्रकारों के लिए दरें पिछले वर्ष की तरह ही
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने पत्रकारों की मांग पर संचार प्रतिनिधियों के लिये स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना में इस वर्ष बीमा कंपनी द्वारा बढ़ायी गयी प्रीमियम राशि का भुगतान शासन द्वारा करने का निर्णय लिया है। बीमा कंपनी द्वारा इस वर्ष प्रीमियम में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। पत्रकारों को अब पिछले वर्ष के प्रीमियम चार्ट के अनुसार ही अपनी उम्र के स्लैब में निर्धारित प्रीमियम राशि ही बीमा कंपनी के खाते में नेफ्ट करनी होगी। अपने हिस्से के साथ ही पत्रकारों के हिस्से की बढ़ी हुई प्रीमियम की राशि भी शासन द्वारा वहन की जायेगी। आवेदन की अंतिम तिथि 27 सितम्बर है।
बीजेपी का कड़ा विरोध
अप्रत्यक्ष तरीके से चुनाव के सरकार के नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। भाजपा ने आरोप लगाये हैं कि महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष को सीधे पार्षदों द्वारा चुनने का जो प्रस्ताव कांग्रेस लाई है, इससे जोड़-तोड़ और खरीद-फरोख्त होगी। ऐसे में पूर्ववत प्रक्रिया जारी रखने की मांग की गई है। वर्तमान में राज्य के अधिकांश नगर निगमों के महपौर और परिषद अध्यक्ष भाजपा के हैं।
दिग्विजय शासनकाल में ऐसे ही होता था चुनाव
गौरतलब है कि करीब 20 वर्ष पहले दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री कार्यकाल में निगम में महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव करवाने का फैसला हुआ था। जबकि इससे पहले चयन का अधिकार पार्षदों को था। वर्तमान प्रावधान के तहत महापौर समेत नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के लिए सीधे चुनाव होता है।
इन प्रस्तावों पर भी मुहर
-महू से इंदौर (मनमाड रेल लाइन) 400 करोड़ की लागत रेलवे लाइन बिछाई जायगी
-जवाहरलाल नेहरू बन्दरगाह ट्रस्ट के तहत बिछाई जायगी रेलवे लाइन
-मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में 650 पदों को खत्म किया जा रहा है
-भविष्य में जो भी कंपनी बनेगी उनमें इन्ही लोगो में से लिया जायेगा
-आउटसोर्स या फिर संविदा से पदों को नहीं भरा जायगा
-3 माह से 6 माह के बच्चों के लिए टेक होम राशन की व्यवस्था आजीविका मिशन की तहत की जायेगी
-मोटर परिवहन एक्ट में हेलमेट, बीमा और दूसरे कागजो के चलते जो जुर्माना बढ़ाया गया है, उस पर विचार के बाद ही उसे लागू किया जायेगा
सॉफ्टवेयर शुरू : पहले 100 यूनिट तक 100 रुपए बिल
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मप्र में शुरू हो गई है। अब बिजली उपभोक्ताओं को 100 यूनिट के 100 रुपये ही देने होंगे। वहीं, 150 यूनिट तक बिजली खपत वाले उपभोक्ता इंदिरा गृह ज्योति योजना के दायरे में आएंगे। 150 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं का बिजली का बिल 385 रुपए आएगा। 150 यूनिट से ज्यादा खपत वाले उपभोक्ता योजना के दायरे में नहीं आएगा।

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