धामी में काली माता को खुश करने के लिए एक-दूसरे पर पत्थर चलाते हैं लोग

शिमला,पत्थरबाजी को बाकी दुनिया भले ही खतरनाक मानती हो, हिमाचल प्रदेश के एक गांव में हर साल लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। पत्थर फेंकने के लिए जलसा भी होता है और ये सब किया जाता है काली माता को खुश करने के लिए। इस साल भी दिवाली के त्यौहार पर गांव के लोग जुटे और पत्थरबाजी करते नजर आए। इस साल यहां का शाही परिवार भी इसमें शामिल रहा। दरअसल, सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार हिमाचल के धामी गांव की एक रानी ने इंसानों की बलि देने की प्रथा को खत्म करने के लिए नई रस्म बनाई। उन्होंने लोगों से मेला लगाने के लिए कहा। उन्होंने तय किया कि इस मेले में दो समुदाय हवा में पत्थर उछालें और जब वह किसी को लग जाए तो उस व्यक्ति का खून काली माता को चढ़ाया जाए। त्यौहार के दिन लोगों ने जुलूस निकाला और रानी के कहे मुताबिक दो समुदायों के लोग पत्थर चलाने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रथा करीब 400 साल पुरानी है। लोग वहां काली माता को खुश करने के साथ ही मेला घूमने भी आते हैं।

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