नई दिल्ली,तीन तलाक विधेयक में संशोधनों के प्रस्ताव को मोदी कैबिनेट ने गुरुवार को मंजूरी दे दी है। संशोधनों के अनुसार, पत्नी को एक बार में तीन तलाक देने के दोषी पति को जमानत मिल सकने का प्रावधान जोड़ा जाएगा। यह मांग विपक्षी दलों ने की थी। विवाह में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को संरक्षण विधेयक लोकसभा से मंजूर हो चुका है। लेकिन, राज्यसभा में अब भी लंबित है।
केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बैठक के बाद कहा कि अगर कोई पति अचानक किसी महिला को तीन तलाक दे देता है और निकाह तोड़ देता है, तब पीडि़ता या उसके किसी सगे-संबंधी की शिकायत पर ही एफआईआर दर्ज होगी। संसद से मंजूरी मिलने के बाद नया कानून तलाक-ए-बिद्दत यानी एक ही बार में तीन बार तलाक कह देने के मामलों पर लागू होगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने 3-2 के बहुमत से कहा था कि तीन तलाक कहने की प्रथा असंवैधानिक और गैरकानूनी है।
बच्चों के लिए गुजारा-भत्ता मांगने का हक
– अगर पति और पत्नी अपने मतभेद सुलझाना चाहते हैं तो जज के पास अपराध माफ करने का अधिकार होगा।
– पत्नी की दलीलों पर सुनवाई के बाद जज उसके पति को जमानत दे सकेंगे।
– पीडि़ता को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा-भत्ता मांगने का भी हक होगा।
– पीडि़ता अपने नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के लिए जज से आग्रह कर सकेगी।
– हालांकि, दोषी पति को अधिकतम तीन साल की सजा के प्रावधान में बदलाव नहीं किया गया है।
तीन तलाक में अब दोषी पति को मिल सकेगी जमानत