नई दिल्ली,पहचान अक्सर मुश्किल परिस्थितियों की ओर ले जाती है, लेकिन एक एनआरआई दंपति के लिए परेशानी का सबब तब बन गया जब उन्हें देश के दो हवाईअड्डों पर तीन बार हिरासत में लिया गया, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हीं के नाम के एक जोड़े के खिलाफ आदेश परिपत्र यानी एलओसी जारी कर रखा था। एनआरआई कपल को तीन बार ऐसी परिस्थितियों से गुजरने के बाद उसी हाईकोर्ट से राहत भी मिली, जिसके एक फैसले से इस दंपति को खासी तकलीफ उठानी पड़ी। हाईकोर्ट ने गृहमंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश भी दिया कि दुबई में रहने वाले इस एनआरआई जोड़े को तब तक हिरासत में नहीं लिया जाए जब तक कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रभाव के लिए विशिष्ट निर्देश जारी नहीं किए जाते। जज ने दुबई के इस जोड़े को बार-बार परेशान करने और संकट में डालने के लिए गृह मंत्रालय पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया।
जु्र्माना भरने से बचने की कोशिश करते हुए गृह मंत्रालय ने न्यायमूर्ति राजीव शकदर के सामने एक अनुरोध पत्र दाखिल किया, जिसमें दावा किया गया कि उसने बिना किसी देरी के एलओसी रिकॉर्ड को सुधार दिया था। लेकिन जज ने मंत्रालय को किसी भी तरह राहत देने से मना कर दिया। इसके बाद मंत्रालय ने हाईकोर्ट की एक डीविजन बेंच में अपील दायर की, जिसे बुधवार को खारिज कर दिया गया। जस्टिस एस रविंद्र भट और एके चावला की बेंच ने मंत्रालय के व्यवहार पर नाराजगी जताई। बेंच ने सवाल किया कि यदि आप 20,000 रुपये की लागत का भुगतान करने को तैयार नहीं हैं, तो हम असहज प्रश्न पूछेंगे। हमें बताएं कि आपने इस अपील पर कितना खर्च किया है? यही कारण है कि हमारे अधिकारी इतनी गर्व से व्यवहार करते हैं, क्योंकि उन्हें जिम्मेदार नहीं माना जाता है।
खंडपीठ ने मंत्रालय को अपना कार्य सही करने को कहा। मंत्रालय ने तर्क दिया कि उसकी तरफ से कोई भी कमी नहीं थी और नामों की समानता के कारण इस जोड़े को गिरफ्तार करने का एकमात्र कारण था। मंत्रालय ने इस आरोप से इंकार कर दिया कि पति को अलग-अलग यात्रा करते समय भी हिरासत में लिया गया था। बेंच ने गृह मंत्रालय के तर्कों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और कहा कि एक चीज की कमी है कि आपने पासपोर्ट की जांच नहीं की।
नाम के कंफ्यूजन में एयरपोर्ट पर ये कपल 3 बार हुआ गिरफ्तार