बजटीय घाटा कैसे पूरा करेगी सरकार: मनमोहन

नई दिल्ली,बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि इस बजट में उनकी चिंता बजट घाटा (फिस्कल) को लेकर है। उन्होंने कहा कि सरकार यह पूरा कैसे करेगी, उन्हें इस बात की चिंता है।कांग्रेस नेता सिंह ने कहा कि सरकार ने किसानों को आगामी खरीफ मौसम से उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत रिटर्न देने के लिए फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य की स्थापना के स्वामीनाथन फॉमरूला का कार्यान्वयन करने का वादा किया है। लेकिन इसका बजटीय प्रावधान कैसे होगा, यह भी विचारणीय है। पूर्व वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मैं इसे राजनीतिक बजट या चुनावी बजट नहीं कहूंगा। उन्होंने कहा कि मेरी चिंता आर्थिक स्थिति को मजबूत करने को लेकर है। रिफॉर्म बजट के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस शब्द का गलत इस्तेमाल काफी हुआ है। मनमोहन सिंह ने लंबे समय में आय की योजनाओं को कर के दायरे में लाने के मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। कांग्रेस पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने बजट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सांसदों के वेतन में महंगाई को समय-समय पर जोड़ने के प्रावधान का स्वागत किया। पटेल ने कहा कि सांसदों को बार-बार अपना वेतन बढ़ाने के लिए वोटिंग करने की असहज स्थिति से राहत मिलेगी। हां, सरकार को इस बजट में वेतन पाने वालों के लिए भी राहत का प्रावधान किया जाना चाहिए था।
– बजट का कोई रोडमैप नहीं
कांग्रेस ने आम बजट को निराशाजनक करार दिया है। पार्टी का कहना है कि बजट में आम आदमी के बजाय कॉरपोरेट को कर में राहत दी गई है। पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार बिना किसी आइडिया के चल रही है। बजट में निर्यात को बढ़ावा देने की कोई चर्चा नहीं है। निजी निवेश को बढ़ाने के लिए बजट में कुछ भी नहीं कहा गया है। उन्होंने स्वास्थ्य बीमा योजना को जुमला करार देते हुए कहा कि सरकार ने इसकी घोषणा करते हुए शायद इस बारे में ज्यादा सोच-विचार नहीं किया है। चिदंबरम ने कहा कि सरकार राजकोषीय घाटे पर काबू पाने में विफल रही है।

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