मेयर-महाराज विवाद में क्या मॉफी मांगेंगे मेयर?

हरिद्वार, मेयर व सतपाल महाराज समर्थकों में हुई मारपीट से हो रही अनुशासित पार्टी की किरकिरी के बाद पार्टी के बड़े नेता इस विवाद को शांत कर सुलहनामें की कोशिशों में जुट गए हैं। अनुमान यही है कि जल्द ही ये मामला सुलटा लिया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि महाराज समर्थकों से पिटने के बावजूद क्या मेयर महाराज पक्ष की ओर से रखी जा रही महाराज से क्षमा मांगने की शर्त पर राजी हो जाएंगे? मेयर व महाराज का विवाद पार्टी के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू की मार्फत भाजपा हाईकमान तक पहुंच गया है। उधर दिल्ली में डटे संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने इस पूरे मामले को पीएम के स्वच्छता अभियान के खिलाफ बताकर और भी गर्मा दिया है। जिसके बाद नगर विकास मंत्री सहित सूबे के बड़े नेता इस विवाद की तपिश को शांत करने में जुट गए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के इस कथन से कि विवाद गलतफहमी के कारण हुआ है, यही लगता है कि अब मामला सुलटने की ओर है। महाराज के पक्ष में संगठन व चार विधायकों के खुलकर खड़े हो जाने के बाद नगर विकास मंत्री भी बैकफुट पर है। महाराज द्वारा दिल्ली में इस पूरे विवाद पर अपने अपमान की बात कहना और हरिद्वार में प्रेम नगर आश्रम के बाहर धरना दे रहे उनके समर्थकों द्वारा भी मेयर के मॉफीनामे के बाद ही धरना समाप्त करने की शर्त रखने से साफ है कि मामले का पटाक्षेप मेयर द्वारा सतपाल महाराज व उनके समर्थकों से मॉफी मांगने के बाद ही होगा। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि सार्वजनिक रूप से महाराज समर्थकों से पिटने वाले मेयर क्या संगठन के दबाव में अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाने को तैयार हो जाएंगे? उधर सीएमआई में मेयर की सेवा-सुश्रुसा में लगे मेयर के एक करीबी का कहना है कि मेयर प्रेमनगर आश्रम किसी निजी काम से नहीं बल्कि लोगों को जलभराव से हो रही परेशानी के लिए गए थे। कानून महाराज के समर्थकों ने तोड़ा है, इसलिए मेयर के मॉफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता!

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