नई दिल्ली, सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वकील जफरयाब जिलानी ने बुधवार को अयोध्या केस में अपनी दलील जारी रखते हुए साफ किया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कभी स्वीकार नहीं किया है कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है। हमारा कहना यह है कि यह हिंदुओं का विश्वास है और जिला जज की इस मामले में ऑब्जर्वेशन के बाद हमारे द्वारा इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाया। जज ने कहा था कि ये राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है। हमारे द्वारा कभी अपनी ओर से नहीं कहा कि ये जन्मस्थान है। हालांकि मंगलवार को सुनवाई के दौरान जफरयाब जिलानी ने कोर्ट में कहा था कि राम चबूतरा राम का जन्मस्थान है और इस पर उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन बुधवार को जिलानी ने अपने बयान पर यू-टर्न ले लिया।
जिलानी ने कहा कि मंगलवार को हमने यह नहीं कहा कि ‘राम चबूतरा जन्मस्थान है। हमने कहा था कि 1886 में फैजाबाद कोर्ट के जज ने कहा था कि ‘राम चबूतरा’ भगवान राम का जन्मस्थान है। हमारे द्वारा कभी उस फैसले को कभी चुनौती नहीं दी। जिलानी ने कहा कि 1950 से 1989 के दौर से पहले जन्मस्थान को लेकर यह विवाद नहीं था कि वह मस्जिद के भीतर है। इसके साथ ही वकील जिलानी ने अपनी दलीलें पूरी की।
अयोध्या मामले की सुनवाई में मंगलवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट में 14 मुस्लिम लोगों ने एफिडेविट दिया था जिसमें राम मंदिर बनाने की पैरवी की थी लेकिन ये सभी न तो इस केस में पक्षकार थे, न ही हाईकोर्ट में इनका कोई बयान हुआ इसलिए इनका कोई औचित्य नहीं था और हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इन्हें अविश्वसनीय ठहराया था। राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन एफिडेविट को अमान्य समझा जाए। जिलानी के बाद मुस्लिम पक्ष की तरफ से वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर बहस शुरू की। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हमारे को यह जानना होगा कि पुरातत्व क्या होता है, यह सोशल साइंस के नेचर पर निर्भर करता है, कुछ मॉडर्न तकनीकी जैसे कार्बन कोटिंग का इस्तेमाल किया जाता है, यह सोशल साइंस से ज्यादा नेचुरल साइंस है। पुरातत्व विभाग ने भी कहा है कि उनकी रिपोर्ट को पूरी तरह से सटीक नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह निष्कर्षों, तथ्यों व राय पर आधारित है, यह एकदम सही निष्कर्ष नहीं होता। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होती है लेकिन फिर भी सेक्शन 45 के तहत इस टेस्ट किया जाना चाहिए।
मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर आधारित रिपोर्ट पर अपनी बहस करेंगी। मीनाक्षी ने कहा कि 1 अगस्त 2002 को हाईकोर्ट ने एएसआई को विवादित स्थल का सर्वे करने को कहा था। 9 दिसंबर 2002 को अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी। रिपोर्ट के आधार पर एक समरी हाईकोर्ट में पेश की गई थी, जिसे हाई कोर्ट ने स्वीकार किया। पुरातत्व विभाग ने कहा कि कुछ अस्थियों के अवशेष खुदाई में पाए गए, लेकिन सभी जांच नहीं की गई। सिर्फ 25 फीसदी की जांच की गई। एएसआई के किसी भी अधिकारी का क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं किया गया क्योंकि उन्हें सरकारी गवाह माना गया था।
सुन्नी वक्फ बोर्ड का SC में यू-टर्न, अब कहा राम चबूतरा राम का जन्मस्थान नहीं