किसानों की पुलिसिया पिटाई,सड़को पर उतरे लड़ाई बढ़ी,9 में से 7 मांगे मानी पर आंदोलन जारी रखेंगे

नई दिल्ली, मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर फिर हजारों किसानों ने हल्ला बोल दिया। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करवाने सहित 9 मांगों को लेकर सड़क पर उतरे किसान उस वक्त उग्र हो गए जब पुलिस ने उन्हें दिल्ली में पहुंचने से रोक दिया। पुलिस-किसान में बढ़ती झड़पक देखकर किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और वाटर कैनन का उपयोग किया गया। पुलिस की इस कार्रवाई में कई किसान गंभीर रूप से घायल हुए तो कई बेहोश हो गए। देर शाम तक किसान-पुलिस के बीच भिड़ंत होती रही। दोपहर को किसान संघ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बीच उनके निवास पर एक बैठक भी हुई, लेकिन उस बैठक का कुछ नतीजा नहीं निकला और रैली का नेतृत्व कर रहे नरेश टिकैत ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। हालाकि सरकार ने किसानों की 9 मांगों में से 7 पर सहमति जताई है। हालाकि किसान नेता महेंद्र टिकैत ने कहा कि हमें सरकार के वादों पर भरोसा नहीं है, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। यह किसान क्रांति यात्रा हरिद्वार से चली और हजारों की संख्या में किसानों ने मंगलवार को दिल्ली की तरफ कूच किया। मगर यहां पहुंचने से पहले उन्हें रोक दिया गया। दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर किसानों को रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की भारी फौज तैनात थी। दरअसल किसान अपनी 9 सूत्रीय मांगों के साथ दिल्ली पहुंचे हैं। किसान इसे लेकर सरकार से आर-पार के मूड में हैं।
यह हैं किसानों की 9 मांगें
1. किसानों के पिछले साल के गन्ना फसल के बकाए भुगतान हो, 14 दिन तक भुगतान हो तो उन्हें इसपर ब्याज मिले। ऐसा न करने वाले शुगर मिलों के खिलाफ कार्रवाई हो
2. स्वामीनाथन आयोगी की रिपोर्ट लागू की जाए। स्वामीनाथन कमेटी के फॉर्मूले के आधार पर किसानों की आय की लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ कर मिले। साथ ही बाजार भाव के मूल्य के अनुपात में उनके फसलों की खरीद की गारंटी दी जाए।
3. किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था हो। सरकारी नौकरियों की तरह 60 वर्ष के बाद किसानों को पेंशन मिले।
4. राज्य सरकार की तर्ज पर केंद्र भी किसानों के कर्ज को माफ करे
5. बिजली के दामों में कमी की जाए।
6. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए। किसानों को होने वाले भुगतान को डिजिटल पेमेंट से जोड़ा जाए। किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए।
7. पिछले 10 साल में आत्महत्या करने वाले लगभग 3 लाख किसानों के परिवार को मुआवजा मिले और उनके परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दी जाए
8. डीजल के दामों में कमी की मांग। दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने ट्रैक्टरों के उपयोग पर से लगी रोक को हटाया जाए
9. आवारा पशुओं से खेत में खड़ी फसलों का बचाव हो
इधर अन्ना का आंदोलन स्थगित
अन्ना हजारे ने महाराष्ट्रमंत्री से चर्चा के बाद प्रस्तावित अनशन स्थगित किया
अहमदनगर। लोकपाल और किसान के मद्दे पर अनशन करने जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अपना प्रस्तावित अनशन फिलहाल स्थगित कर दिया है। उन्होंने यह फैसला महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन से बातचीत के बाद किया है। हफ्ते भर इस अनशन की घोषणा करते वक्त अन्ना हजारे ने कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार लोकपाल आंदोलन के कारण केन्द्र की सत्ता में आयी और वह लोकपाल की नियुक्ति को लेकर दो अक्तूबर से भूख हड़ताल शुरू करने के अपने फैसले पर अटल हैं। हजारे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि पिछले चार साल में सरकार टाल-मटोल का रवैया अपनाती रही और लोकपाल या लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की। हजारे ने लिखा, ‘लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति के लिये 16 अगस्त, 2011 को समूचा देश सड़कों पर उतर आया था। आपकी सरकार इसी आंदोलन की वजह से सत्ता में आयी।Ó उन्होंने कहा, चार साल बीत गये लेकिन सरकार किसी न किसी कारण से लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति टालती रही। इसके साथ ही हजारे ने घोषणा की थी कि वह गांधी जयंती के अवसर पर दो अक्टूबर से रालेगण सिद्धि में भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिसके चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

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