जबलपुर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति नंदिता दुबे ने एक अहम फैसला दिया है। इस फैसले में उन्होंने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों के जीणोद्धार या पुनर्निर्माण के अधिकार से किसी भी संप्रदाय को वंचित नहीं किया जा सकता है।
फैसले में उन्होंने लिखा है कि भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। इस नाते हर धर्म के साथ समानता और निष्पक्षता के साथ व्यवहार होना ही चाहिए न्यायमूर्ति नंदिता दुबे ने दाऊदी बोहरा मस्जिद के पुनर्निर्माण को को लेकर लगी हुई याचिका में सुनवाई करते हुए पुनर्निर्माण याचिका को स्वीकार किया। हाईकोर्ट ने सागर नगर निगम पर कोर्ट का आदेश नहीं मानने पर 10000 रुपए का भी जुर्माना लगाया है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय में 1861 का खसरा पेश करते हुए बताया था कि 1861से मस्जिद अस्तित्व में थी 1951 में वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित की गई दाऊदी बोहरा समाज की समिति ने 2003 में मस्जिद को गिराकर फिर से बनाने का निर्णय लिया था नगर निगम सागर में नक्शा जमा कराया था 2005 में उसे अनुमति मिल गई थी मस्जिद निर्माण का काम शुरू करने पर कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध किया उसके बाद नगर निगम सागर ने 2006 में नक्शा निरस्त कर दिया जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी।
धर्मस्थलों को पुनर्निर्माण और जीणोद्धार से वंचित नहीं किया जा सकता :- हाईकोर्ट