UP की इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति’ घोषित,नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस-वे होंगे मैन्युफैक्चरिंग जोन

लखनऊ,उत्तर प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ई.एस.डी.एम.) उद्योग में इको सिस्टम को गति प्रदान करने के लिए ‘यू0पी0 इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति-2017‘ जारी कर दी है। इसके तहत  नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस-वे को ‘इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफैक्चरिंग जोन‘ घोषित किया गया है। यू0पी0 इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति के समस्त प्रोत्साहन एवं लाभ इस उद्घोषित क्षेत्र मे स्थापित होने वाली सभी इकाइयों के लिए अनुमन्य होंगे।प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं आई.टी. इलेक्ट्रानिक्स मंत्री डा0 दिनेश शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि ये सुविधाएं इस जोन में ई.एस.डी.एम. इकाइयों की स्थापना में वृद्धि के प्रति उत्प्रेरक होंगी, जो न केवल अर्थ व्यवस्था को बढ़ावा देगी, बल्कि राज्य में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी प्रदान करेंगी। उन्होंने बताया कि इस नीति का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाना है। इसके साथ ही प्रदेश मंे अनुकूल परिवेश प्रदान करके राज्य को देश में सर्वाधिक वरीयता वाले निवेश गन्तव्य (च्तममितमक क्मेजपदंजपवद) के रुप में स्थापित करके इलेक्ट्रानिक्स उद्योग को प्रोत्साहन प्रदान करना, इकाइयों को सिंगिल विंडो सिस्टम प्रदान करना, इलेक्ट्रानिक्स में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना तथा इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र में जनशक्ति के लिए कौशल विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि इस नीति का लक्ष्य ई.एस.डी.एम. क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना तथा 2022 तक 3,00,000 (तीन लाख) लोगों के लिए रोजगार सृजित किया जाना है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रानिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (म्डब्े)/ई.एस.डी.एम. पाक्र्स की स्थापना, अधिकतम निवेश को आकर्षित करना, फैब इकाई की स्थापना पर बल दिया जाना तथा प्रादेशिक सकल घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) में वृद्धि करना है।इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए एक इलेक्ट्रानिक मिशन निदेशालय होगा। इस मिशन निदेशालय में एक स्थाई मिशन निदेशक, उपनिदेशक तथा वित्त एवं प्रशासन प्रभाग के पदाधिकारियों के अतिरिक्त कन्सलटेंट एवं यथावश्यक अन्य स्टाफ होगा। मिशन निदेशलय द्वारा निवेशकों से वार्ता की जाएगी तथा निवेशकों द्वारा प्रस्तुत निवेश प्रस्तावों को नीति कार्यान्वयन इकाई (च्प्न्) के अनुमोदन के अनुरुप मिशन निदेशक द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मिशन निदेशालय द्वारा समय-समय पर इवेन्ट, कार्यशाला एवं कान्फे्रंस में प्रतिभाग किया जाएगा। निवेश प्रस्ताव पर सक्षम स्तर से अनुमोदन के उपरान्त लेटर आॅफ कम्फर्ट जारी किया जाएगा।

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