मुंबई, विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक के खिलाफ दायर दस्तावेजों में खामियों की वजह से इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं करने से इनकार कर दिया है। इससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को गहरा झटका लगा है। भारत ने टीवी पर प्रचार करनेवाले इस प्रचारक के खिलाफ नए सिरे से आरोप पत्र दायर करने का फैसला किया है। इंटरपोल ने अपने सदस्यों देशों के संबंधित ब्यूरो को भी निर्देश भेज दिया है कि वे नाईक के खिलाफ सारे आंकड़े अपने रिकॉर्ड से हटा दें। इंटरपोल अपने सदस्य देशों से जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर किसी वांछित व्यक्ति के को खोजने और गिरफ्तार करने के लिए रेड नोटिस जारी करती है।
नाईक के मामले में भारत से वारंट न मिलने के कारण इंटरपोल आयोग ने अपने 24-27 अक्तूबर की 102री बैठक में नोटिस जारी न करने का फैसला किया है। इस मामले में ढाका में 1 जुलाई 2016 को आतंकी हमले में शामिल आतंकियों के नाईक से प्रभावित होने की बात सामने आने के बाद नाईक भारत से मलेशिया भाग गया था। 51 वर्षीय प्रचारक ने एक वीडियो संदेश में कहा कि वह इंटरपोल के फैसले से राहत महसूस कर रहा है। भारतीय अदालत से न्याय मिलने के बाद वह पूरी तरह से राहत महसूस करेगा। पिछले साल नवंबर में ही एनआईए ने इंटरपोल से अनुरोध किया था। हालांकि एनआईए के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अब हम फिर से औपचारिक आरोप पत्र के साथ इंटरपोल से जल्द ही अनुरोध करेंगे।