मेढक का ‘प्रशांत’, मछली का नाम ‘भुजिया’ रखा गया

नई दिल्ली, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट में जानकारी दी गई है ‎कि भारत में साल 2019 में जानवरों की 364 नई प्रजातियों की खोज की गई है।नए विज्ञान की इन प्रजातियों को बड़े विचित्र और मजाकिया नाम भी दिए गए हैं। देश की जैव विविधता को और समृद्धि देने वाली इन प्रजातियों के नामकरण की प्रक्रिया इनकी खोज से ज्यादा दिलचस्प है।
उदाहरण के तौर पर केरल के मलप्पुरम में खोजे गए सांप के सिर वाली एक मछली को ही लें। जीव वैज्ञानिकों ने इस मछली का नाम जेआरआर टॉल्किन की नॉवेल ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ से उधार लेकर ‘गोलम’ रखा है। वहीं एक अन्य मछली की नई प्रजाति का नाम वैज्ञानिकों ने ‘भुजिया’ रखा है क्योंकि इसकी आकृति मशहूर भारतीय स्नैक्स भुजिया की तरह दिखती है। भुजिया और गोलम को आगे के शोध के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी में रखा गया है। झेडएसआई के निदेशक कैलाश चंद्र ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में 1 लाख से ज्यादा नई प्रजातियों की खोज की गई है। जब उनका नामकरण करने की बात आती है, तो वैज्ञानिक अक्सर किसी जोक से भी प्रेरित हो जाते हैं। या फिर किसी ‘हीरो’ को श्रद्धांजलि देते हुए उसके नाम पर प्रजातियों का नाम रख दिया जाता है। किसी समसामयिक घटना पर भी प्रजातियों के नाम रखे जाते हैं। यहां तक कि स्नैक्स के नाम पर भी नई प्रजातियों के नाम रखे गए हैं। ऐसे ही एक कीड़े का नाम रिसर्चर्स ने ‘एम्फीक्रोसस कबिताए’ रखा है। बताया गया कि जिस शोधकर्ता ने इस प्रजाति की खोज की थी, उसकी मां का नाम कबिता दासगुप्ता है। ऐसे ही कई प्रजातियों का नाम उनके तौर-तरीकों या फिर स्थानीय संस्कृति और मान्यताओं के नाम पर भी रखा जाता है। तमिलनाडु के कोडईकनाल में छिपकली की एक नई प्रजाति पाई गई तो उसका नाम ‘थोलपल्ली’ रख दिया गया। थोलपल्ली दो तमिल शब्दों थोल और पल्ली की मेल है। थोल का मतलब पुराना होता है जबकि पल्ली का अर्थ छिपकली है।
हिमाचल प्रदेश में सताक्षी नाम की छात्रा ने वॉइटफ्लाइ प्रजाति के एक कीड़े की खोज की तो उसके नाम पर ही इस नई प्रजाति का नामकरण कर दिया गया। सफेद रंग के इस खटमल (बग) का नाम ‘पीलियस सताक्षिआ’ रखा गया है।अरुणाचल प्रदेश के तवांग मॉनेस्ट्री (मठ) के इलाके में एक कीड़े की खोज हुई तो उसका नाम ‘प्रशांत’ रख दिया गया। इसका मतलब शांति और करुणा होता है, जो इलाके के बौद्धों की प्रचलित आस्था का प्रतीक है। ऐसे ही असम के कछार में पाए गए एक मेढक का नाम ‘ऐशानी’ रखा गया।

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