पांढुरना,राज्य शासन द्वारा किसानों के सिंचाई योजना के लिए बड़े स्तर पर जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है।इसी क्रम में राज्य शासन द्वारा जल संसाधन विभाग के अंतर्गत ग्राम कुकड़ी खापा में डोल नाला जलाशय का निर्माण विगत 2 वर्षों से किया जा रहा है परंतु इस जलाशय निर्माण में डूब क्षेत्र में आई 47 किसानों की जमीन तो अधिग्रहित कर ली गई परंतु जिन्हें अधिग्रहण के नाम पर मुआवजे के रूप में जो राशि राज्य शासन द्वारा दी जानी थी उसके दूर तक आसार नजर नहीं आ रहे। जमीन मालिक जल संसाधन विभाग के चक्कर काट कर थक चुके हैं। इन लोगों ने शुक्रवार को आदिवासी नेता दुर्गेश उईके के नेतृत्व में नगर के शंकर नगर से जल संसाधन विभाग कार्यालय तक बड़ी रैली निकाली और अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने एसडीओ जल संसाधन विभाग शामराव धुर्वे से तर्क वितर्क किया और कई बार किसानों को जवाब न देते हुए वे नजरें चुराते भी नजर आए।
दो साल पहले किया था अधिग्रहण
किसानों का कहन है कि दो साल से डोलनाला जलाशय का काम शुरू कर दिया गया लेकिन किसानों को मुआवजा अब तक नहीं मिला। उनकी उपजाऊ जमीन पर बड़ी-बड़ी मशीनों से कार्य शुरू हो गया है। जलाशय का 70 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है लेकिन किसानों को मुआवजे के नाम पर केवल तारीखें एवं भोपाल जल संसाधन कार्यालय का झुनझुना थमा दिया जाता है। इसको लेकर किसान अब आक्रोशित हो गए हैं। ग्राम कुकड़ी खापा और अन्य ग्रामों के 47 किसानों की जमीन डोल नाला जलाशय निर्माण मे डूब क्षेत्र में आई है।
ठेकेदार को पैसा किसानों को ठेंगा
ध्यान रहे जलाशय काकाम कर रहे ठेकेदार को विभाग बराबर भुगतान कर रहा है लेकिन किसानों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। किसान इसको लेकर और गुस्साए हैं। किसानों का कहना है कि जलाशय निर्माण के मुआवजा राशि में जल संसाधन विभाग की कार्यवाही संदेह के घेरे में है।
भूखहड़ताल की दी धमकी
किसान अब इस मुद्दे पर गंभीर दिख रहे है। किसानों का कहना पड़ा कि वे 13 तारीख को एसडीएम कार्यालय मेंधरना और भूख हड़ताल पर बैठने की तैयारी में हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को 3 दिन का समय देते हैं यदि 3 दिवस के अंदर उनका मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ तो वह विभिन्न किसान संगठनों के साथ मिलकर बड़ा जन आंदोलन करते हुए एसडीएम कार्यालय के समीप भूख हड़ताल पर ब्रैठ जाएंगे।
इनका कहना है
किसानों की मुआवजे की 6 करोड़ 50 लाख की राशि में से विभाग को मात्र दो करोड़ की राशि प्राप्त हुई है। जबकि बाकी 4 करोड़ की राशि के लिए जल संसाधन विभाग भोपाल कार्यालय को लगातार पत्र लिखा जा रहा है। वहां से जारी होते ही किसानों को उनका मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएंगी।