हरसिमरत कौर बादल का इस्‍तीफा मंजूर, नरेंद्र सिंह तोमर को दिया गया अतिरिक्त प्रभार

नई दिल्‍ली, केंद्र सरकार के नए कृषि आध्यादेश को लेकर उठे तूफान के बाद शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की नेता हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्‍तीफा दे दिया जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। उन्‍होंने कृषि बिलों के विरोध में गुरुवार को खाद्य प्रसंस्करण मंत्री का पद छोड़ दिया था। कौर की जगह राष्‍ट्रपति ने नरेंद्र सिंह तोमर को मंत्रालय का अतिरिक्‍त प्रभार सौंपा है। एनडीए में शामिल अकाली दल ऐसे तीन बिलों में से पहले बिल का विरोध किया था, जिसे लोकसभा में पारित कर दिया गया है। हरसिमरत कौर ने प्रधानमंत्री मोदी को सौंपे इस्तीफे में अपनी पार्टी और किसानों को एक दूसरे का पर्याय बताया है। उन्‍होंने कहा कि, किसानों के हितों से उनकी पार्टी किसी तरह का समझौता नहीं कर सकती। दरअसल, कृषि सुधारों से जुड़े तीनों बिलों पर शिरोमणि अकाली दल के तेवर शुरूआत से ही तल्ख थे। राज्यसभा के चीफ विप नरेश गुजराल ने बुधवार को पार्टी सांसदों को बिल के खिलाफ वोटिंग का निर्देश दिया था।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल से कृषि बिलों के मसले पर बातचीत चलने की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि कृषि बिलों पर भ्रम फैलाया जा रहा है। सहयोगी अकाली दल से पार्टी की बातचीत चल रही है। अकाली दल की जल्द ही बिलों को लेकर गलतफहमी दूर होगी। हालांकि, नड्डा के दावे के अनुरूप ऐसा नहीं हो सका। कृषि बिलों को किसान विरोधी बताते हुए हरसिमरत कौर ने इस्तीफे की घोषणा कर दी।
गुरुवार को लोकसभा में अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने हरसिमरत कौर के इस्तीफे की बात कह दी। वहीं बाद में हरसिमरत कौर ने ट्वीट कर आधिकारिक तौर पर बयान भी जारी कर दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और बिल के खिलाफ केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। किसानों की बेटी और बहन के रूप में उनके साथ खड़े होने पर गर्व है।” भाजपा का मानना है हरसिमरत कौर के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के पीछे पंजाब की स्थानीय राजनीति प्रमुख वजह है। भाजपा में आर्थिक मामलों के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, तीनों कृषि बिलों से किसानों को ही फायदा पहुंचने वाला है। लेकिन पंजाब में जिस तरह से कांग्रेस ने झूठ फैलाया है, उससे मुझे लगता है कि शिरोमणि अकाली दल भी स्थानीय राजनीति के दबाव में आ गई। जिसकी वजह से हरसिमरत कौर से इस्तीफा दिलाया गया। जबकि तीनों बिलों से किसानों को होने वाले फायदे से शिरोमणि अकाली दल भी वाकिफ है।

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