मप्र का विधानसभा सत्र 21 से शुरू होना है, लेकिन 20 % विधायक हैं कोरोना संक्रमित

भोपाल, कोरोना संक्रमण के बीच विधानसभा का सत्र 21 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। इसको लेकर विधानसभा सचिवालय ने पूरी तैयारियां कर ली हैं। अभी तक 20 फीसदी से अधिक विधायक कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। विधायक कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में सत्र बुलाए जाने को लेकर विधानसभा की चिंता बढ़ गई हैं। हालांकि कोरोना के प्रोटोकॉल के तहत सत्र के दौरान विधानसभा में सिर्फ विधायक एवं अधिकारियों को प्रवेश मिलेगा।
अभी तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, 10 से ज्यादा मंत्री एवं करीब तीन दर्जन विधायक कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। विधानसभा के मौजूदा सदस्यों की संख्या 203 है। संक्रमण की बढ़ती संख्या को देखते हुए विधानसभा ने सभी कलेक्टरों को चिटठी लिख दी है कि वे सत्र से पांच दिन पहले की विधायकों की कोविड टेस्ट रिपोर्ट भेजें। इससे यह साफ हो जाएगा कि विधायक संक्रमित है या नहीं। इसके साथ ही विधानसभा अपने 100 अधिकारियों व कर्मचारियों की भी कोरोना जांच 15 सितंबर को कराएगा ताकि संक्रमण को लेकर तस्वीर साफ रहे। ये कर्मचारी सदन के काम में जुटते हैं। विधानसभा ने यह कार्यवाही इसलिए की है क्योंकि, अभी तक मप्र में मुख्यमंत्री व मंत्री से लेकर विधायक तक 45 लोग संक्रमित हो चुके हैं। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा कि विधायक पॉजिटिव हो रहे हैं। दो-तीन दिन में होने वाली सर्वदलीय बैठक में सभी विकल्प और पहलुओं पर बात होगी। कोविड का कुछ प्रोटोकॉल है, तो उसे करना ही पड़ेगा।
ये हो चुके हैं संक्रमित
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मंत्री गोपाल भार्गव, विजय शाह, तुलसी सिलावट, अरविंद भदौरिया, विश्वास सारंग, महेन्द्र सिंह सिसौदिया, प्रभूराम चौधरी, ओमप्रकाश सकलेचा, मोहन यादव संक्रमित हो चुके हैं। जबकि विधायकों में दिव्याराज सिंह, बैतूल विधायक ब्रम्हा भलावी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति, विधायक व पूर्व वित्तमंत्री तरुण भनोत, विधायक गोवर्धन दांगी, विधायक व पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा समेत तीन दर्जन करीब संक्रमित हो चुके हैं। आरिफ अकील बीमार हैं। वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने दिल्ली में एंजियोप्लास्टी कराई है।
सत्र बुलाना अनिवार्य
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक सीता सरन शर्मा ने कहा कि संवैधानिक बाध्यताएं हैं, जिन्हें पूरा करना होगा। कई राज्य सत्र बुला रहे हैं। यह जरूर है, इसे एक दिन का किया जा सकता है। दो सत्रों के बीच भी काफी समय हो गया है। यह जरूर है कि इसे एक या डेढ़ दिन का किया जा सकता है। सत्र बुलाना अनिवार्य है।

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