राम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला को ही गर्भगृह में किया जायेगा प्रतिष्ठित

अयोध्या, रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण के बाद विराजमान रामलला ही गर्भगृह में प्रतिष्ठित किए जाएंगे। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में जिन्होंने मुकदमा लड़ा है और जिनके पक्ष में डिग्री अवार्ड हुई है, उन्हें कैसे बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि मंदिर बनने के बाद भी यही रामलला अपने पूर्व के निर्धारित स्थान पर प्रतिष्ठित होंगे। मालूम हो कि 22/23 दिसम्बर 1949 को रामलला के प्राकट्य के बाद नये सिरे से सिविल कोर्ट में मामला शुरू हुआ था। सबसे पहले निर्मोही अखाड़ा ने 1959 में रामलला की सम्पत्ति पर अपना दावा किया। फिर 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित ढांचे पर अपने स्वामित्व का दावा किया। इसके पूर्व 1950 में हिन्दू महासभा के अधिवक्ता गोपाल सिंह विशारद व उसके बाद दिगम्बर अखाड़ा के महंत रामचंद्र दास ने बहैसियत श्रद्धालु रामलला को न हटाए जाने का मुकदमा दायर किया था। इसके बाद 1989 में सेवानिवृत्त जस्टिस देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला के सखा के रूप में रामलला की ओर से मुकदमा दायर किया था।
अयोध्या रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि पांच अगस्त को भूमि पूजन के समय नींव में रखी गयी सभी पूजित सामग्रियों को सावधानीपूर्वक विशेष लॉकर में संरक्षित करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी पूजित सामग्रियों को रामलला के गर्भगृह के ठीक नीचे नींव का कार्य पूरा होने पर यथावत रखवाया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि नींव मेंं रखी सामग्रियों में मूल्यवान धातुओं का इतना वजन है कि सामान्य आलमारी नहीं झेल सकेगी। इस पूजन में 48 हजार की धनराशि भी है।

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