लखनऊ,उत्तर प्रदेश के लखनऊ के कैसरबाग, मड़ियांव और काकोरी इलाके की मस्जिदों में बिना सूचना ठहरे 24 विदेशियों के खिलाफ बुधवार रात को एफआईआर दर्ज कर ली गई। लॉक डाउन उल्लंघन, महामारी फैलाने और टूरिस्ट वीजा पर आकर धार्मिक आयोजन में शामिल होने की धारा के तहत तीनों एफआईआर कैसरबाग, मड़ियांव और काकोरी थाने में लिखी गई। इन मुकदमों में मस्जिदों के व्यवस्थापकों को भी नामजद किया है। इन पर इन विदेशियों के रूके होने की सूचना न देने का आरोप है। वहीं पुलिस ने इन सभी के पासपोर्ट जब्त कर लिये हैं।
पुलिस अफसरों का कहना है कि इन सभी को क्वॉरनटाइन किया जा चुका है। यह अवधि पूरी होने के बाद अगर ये स्वस्थ रहते हैं तो इन्हें इनके देश भेज दिया जायेगा। इसके लिये गृह विभाग को पत्र लिखा जा रहा है। निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के आयोजन में यूपी के 157 लोगों के शामिल होने की बात सामने आने पर हड़कम्प मच गया था। इसके बाद ही सामने आया था कि इस जमात के प्रचार के लिये और इनसे जुड़े कई प्रचारक व अन्य लोग लखनऊ की मस्जिदों में रुके हुए हैं। इसके बाद ही ताबड़तोड़ कैसरबाग, काकोरी और मड़ियांव में मस्जिदों में छापे मारे गए थे। इस दौरान तीनों स्थानों से कजाकिस्तान, किर्जिस्तान और बांग्लादेश के 24 लोग मिले थे। ये लोग 13 से 19 मार्च के बीच लखनऊ आए थे और इन्हें चार अप्रैल को अपने देश लौटना था।
मड़ियांव इंस्पेक्टर विपिन सिंह का कहना है कि उनके यहां सात बांग्लादेशी मिले थे। इनके और मस्जिद के व्यवस्थापक मुतक्कीपुर निवासी मौलाना मेराज व कादरी को नामजद किया है। कैसरबाग इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्र ने बताया कि विदेशी नागिरकों व मरकजी मस्जिद के व्यवस्थापक अली हसन के खिलाफ एफआईआर लिखी गई है। इसी तरह काकोरी इंस्पेक्टर का कहना है कि पलिया स्थित जामा मस्जिद के मुतवल्ली कासिम अली व विदेशी नागरिकों पर केस लिखा गया है।
यूपी में कई स्थानों की मस्जिदों में ठहरे 24 विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट जब्त कर दर्ज किये गए केस