मप्र में डॉक्टर गांवों में सेवा देने से नहीं बच सकेंगे, ग्रामीण सेवा बांड नहीं भरा तो खत्म होगा पंजीयन

भोपाल, प्रदेश के डॉक्टरों द्वारा अनिवार्य ग्रामीण सेवा बांड के तहत ग्रामीण अंचलों में सेवा भी नहीं की जा रही है और बांड की राशि जमा नहीं की जा रही है, ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ मप्र मेडिकल काउंसिल ने सख्ती दिखाना शुरु कर दिया है। ऐसा नहीं करने वाले डॉक्टरों का मप्र मेडिकल काउंसिल से पंजीयन खत्म किया जाएगा। इसके पहले उन्हें पंजीयन खत्म करने का नोटिस देकर जवाब मांग जाएगा। प्रदेश में 2002 से 2018 तक 3899 यूजी व पीजी डॉक्टरों ने न तो बांड की राशि जमा की और न ही सेवा दी। इसके बाद संबंधित कॉलेजों ने इन्हें नोटिस जारी किया तो कुछ ने राशि जमा कर दी। अब चिकित्सा शिक्षा संचालनालय इन सभी कॉलेजों से बांडेड डॉक्टरों की पूरी जानकारी मांग रहा है। सोमवार को इस संबंध में जीएमसी के डीन डॉ. आदित्य अग्रवाल को बुलाया गया था। वह जानकारी लेकर नहीं पहुंचे, लिहाजा मंगलवार को संचालनालय ने डीन को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
संचालनालय के अफसरों ने बताया कि हर कॉलेज में 100 से 200 ऐसे डॉक्टर हैं जो दिए गए पते पर नहीं मिल रहे हैं। उनके नोटिस विभाग को लौट आए हैं। अखबारों में उनके नाम प्रकाशित कर सूचना दी जा रही है। बता दें कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकारी कॉलेज से यूजी व पीजी करने वाले डॉक्टरों को एक-एक साल के अनिवार्य ग्रामीण सेवा करना होती है। ऐसा नहीं करने पर 5 से 10 लाख रुपए जमा करना होता है। डॉक्टरी पढाई पूरी करने के बाद ज्यादातर डॉक्टर ग्रामीण अंचलों के अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने का रोना रोकर वहां जाने से बचने के तरीके खोजने लग जाते हैं। वहीं कुछ लोग धन कमाने की मंशा से विदेशों में जाकर सेवाएं देने लगते हैं। दूसरी ओर देश के ग्रामीण अंचलों के सैकडों अस्पताल सालों से डॉक्टरों के इंतजार में खाली पडे हुए और वहां के मरीज नीम हकीमों की शरण में जाकर अपनी जान गंवा रहे हैं, लेकिन इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आज भी भगवान भरोसे जीने के मजबूर है।

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