भुवनेश्वर, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोस्ती की शानदार मिसाल पेश की है। अपने एक मित्र को एक समारोह की भीड़ में देखकर उन्होंने प्रोटोकॉल तोड़ दिया। उन्होंने मित्र को भीड़ से मंच पर बुलाया और गले लगाया। यह दृश्य देखकर कई लोगों को कृष्ण और सुदामा के मिलन की याद आ गई।
ओडिशा के उत्कल विश्वविद्यालय के प्लेटिनम जुबली समारोह में रविवार को पहुंचे राष्ट्रपति मंच पर मौजूद थे। तभी राष्ट्रपति ने उस भीड़ में बैठे अपने एक 12 साल पुराने दोस्त बीरभद्र सिंह को देखा। अपने मित्र को करीब देखकर उससे मिलने की उत्सुकता उनमें बढ़ गई। उन्होंने प्रोटोकॉल को भुलाकर मित्र को मंच पर बुलाया और गले से लगा लिया।
केंद्रीय मंत्री से की गुजारिश
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम के दौरान ही केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से गुजारिश की कि कार्यक्रम के समापन के बाद वह उनके मित्र को मंच पर ले आएं। जब दोनों मिलें, तो उन्होंने एक-दूसरे को गले से लगा लिया। दोनों मित्र एक लंबे अरसे बाद मुलाकात कर रहे थे तो साथ में कुछ तस्वीरें भी खिंचवाई। दरअसल, राष्ट्रपति ने अपने मित्र बीरभद्र को भीड़ में सिर्फ सफेद रंग की पगड़ी से पहचाना था।
राज्यसभा की समिति में रहे
राष्ट्रपति के दोस्त बीरभद्र 2000 से 2006 तक राज्यसभा में एससी/एसटी समिति के सदस्य रहे हैं। उस दौरान राष्ट्रपति कोविंद भी इसके सदस्य थे। दोनों ने दो वर्षों तक साथ काम किया है।
मिलने का अंदाज आज भी वैसा ही
बीरभद्र ने मुलाकात के बाद कहा कि वे राष्ट्रपति से 12 साल बाद मिल रहे हैं। लेकिन, उनका मिलने का अंदाज आज भी वैसा ही है, जैसा पहले हुआ करता था। मैं अपने दोस्त से मिलकर बहुत खुश हूं।
उत्कल विश्वविद्यालय के प्लेटिनम जुबली समारोह में प्रोटोकॉल तोड़ राष्ट्रपति ने दोस्त को मंच पर बुलाया