हाईकोर्ट में मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पुनर्गठन को चुनौती,चेयरमेन सहित अन्य को नोटिस जारी

जबलपुर, मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड के पुनर्गठन में नियमों का पालन नहीं किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। कार्यवाहक चीफ जस्टिस आरएस झा तथा जस्टिस व्हीके शुक्ला की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जबाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गयी है।
यह जनहित का मामला भोपाल निवासी अजय दुबे की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि हाल में ही मप्र प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्ज मिला है। वन प्राणियों के संरक्षण में मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड की भूमिका अहम रहती है। आवेदक का कहना है कि प्रदेश सरकार ने 3 अगस्त 2019 को मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड का पुनर्गठन किया है।
नहीं बनाये धारा 6 के तहत आवश्यक नियम
याचिका में कहा गया था कि वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 6 के तहत प्रदेश सरकार ने आवश्यक नियम नहीं बनाये हैं। जिसके अभाव में मप्र राज्य वन्य प्राणी बोर्ड का गठन किया जाना अवैधानिक है । याचिका में कहा गया है कि पुनर्गठित वन्य प्राणी संरक्षण बोर्ड में अनुसूचित जनजाति के दो गैर सरकारी सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है, जो नियम का उल्लंघन है। इसके अलावा राशिद किदवई, केके सिंह तथा बृजेश सिंह को वन्य प्राणी में रूचि होने के कारण सदस्य बनाया गया है।
दी अयोग्यों को नियुक्ति
नियम अनुसार गैर सरकारी सदस्य को वन्य प्राणी संरक्षण में एक्सपर्ट होना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि राजनैतिक सिफारिशों व भाई भतीजावाद और भ्रष्ट आचरण के कारण बोर्ड में अयोग्य सदस्यों की नियुक्ति हुई है। जिसे भंग करने की मांग याचिका में की गयी है।

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