कोलार में जल संकट, यहाँ की आधा दर्जन कॉलोनियों में पानी की किल्लत

भोपाल,उपनगर कोलार क्षेत्र की आधा दर्जन कॉलोनियों में जलसंकट गहरा गया है। इन कॉलोनियों की हजारों की संख्या में आबादी जलसंकट से जूझ रही है। इन कॉलोनियों में बैरागढ़ चीचली, गेहूंखेड़ा, प्रिंयका नगर सहित अन्य आसपास की कॉलोनिया शामिल है। 52.10 करोड़ की केरवा पेयजल योजना के तहत कोलार में 20-20 लीटर पानी की क्षमता की पांच टंकियां बनाई गई हैं। इनमें से चार से ही पानी की सप्लाई की जा रही है। एक टंकी से अब तक सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है।दरअसल, नगर निगम ने बंजारी दशहरा मैदान, पैलेस ऑर्चड कॉलोनी, नयापुरा, ललिता नगर और बैरागढ़ चीचली में पानी की टंकियां बनाई हैं। इन टंकियों से केरवा डैम का पानी कॉलोनियों में सप्लाई किया जा रह है, लेकिन अभी तक बैरागढ़ चीचली की टंकी से पानी सप्लाई नहीं किया जा रहा है। इससे यहां के लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं केरवा पेयजलय योजना के तहत वार्ड 84 में आने वाले प्रियंका नगर, गेहूंखेड़ा, एक्सटेंशन सहित आसपास की कॉलोनियों में पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। ऐसे में वार्ड 84 की अधिकतर कॉलोनियों के लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पानी की समस्या से परेशान लोगों को हर साल की तरह इस बार भी गर्मी में पानी के टैंकर खरीदने पड़ रहे हैं।
कोलार के एक दर्जन इलाकों में ननि के 20 टैंकर पानी की सप्लाई नहीं कर पा रहे। दामखेड़ा, सनखेड़ी, बांसखेड़ी, गणेश नगर, ओम नगर सहित अन्य स्लम एरिया में पानी नहीं पहुंच रहा है। इतना ही नहीं कॉलोनियों में रखी टंकियां भी नगर निगम के टैंकरों द्वारा नहीं भरी जा रही हैं, जिससे लोग जल संकट की समस्या से जूझ रहे हैं। घरों में लगी बोरिंग गर्मी के कारण सूख गई हैं। राजवैद्य, राजहर्ष ए व बी सेक्टर, बंजारी, गणपति इन्क्लेव सहित अन्य कॉलोनियों के घरों में लगीं बोरिंग पानी नहीं दे रही हैं। इससे पानी की समस्या बढ़ गई है। मई में जल संकट और गहराएगा। पानी की समस्या के चलते लोगों कोलार पाइपलाइन के वॉल्बों से निकलने वाले पानी को भरना पड़ रहा है। इस संबंध में नगर निगम के जलकार्य शाखा के प्रभारी आशीष मार्तंड का कहना है कि कोलार में केरवा का पानी आने से पिछले सालों की तरह जल संकट नहीं है। जल्द ही केरवा के बाकी नल कनेक्शन का काम पूरा किया जाएगा। बैरागढ़ चीचली की पानी की टंकी से भी पानी सप्लाई होगा। इसके बाद जल संकट की समस्या से लोगों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।

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