नई दिल्ली,प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को एआईसीसी का महासचिव बनाने के साथ उसी दिन 4 संयुक्त सचिवों की नियुक्ति भी की गई। ऐसे लोगों को ये पद दिए हैं, जिनमें दो पार्टी में डाटा एनालिस्ट हैं और दो उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के निजी सहायक हैं। पार्टी के इस फैसले से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। नवनियुक्त संयुक्त सचिव शशांक शुक्ला और गोकुल बुटेल पिछले कई सालों से कांग्रेस मुख्यालय में बतौर डाटा एंट्री ऑपरेटर काम कर रहे थे। उनके नियुक्ति पत्र में उन्हें डाटा एनालिसिस विभाग से अटैच किया है। संयुक्त सचिव नियुक्त होने वाले हरिपाल रावत 1997 से हरीश रावत के सहयोगी रहे हैं। जबकि एक अन्य संयुक्त सचिव डॉ. संजय चौधरी पेशे से चिकित्सक हैं। दोनों को असम के प्रभारी हरीश रावत की सिफारिश पर ही नियुक्त किया गया है और उन्हें रावत के साथ ही संबद्ध किया है। डॉ. चौधरी ने ही हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते उनकी गर्दन का इलाज किया था। उसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री का राजनीतिक सलाहकार बना दिया गया।
वहीं हरिपाल रावत का कहना है कि वे 1980 के दशक से उत्तराखंड आंदोलन में शामिल रहे हैं, लेकिन हरीश रावत के साथ 1997 में जुड़े। उनके मुख्यमंत्री रहते हरिपाल उनके राजनीतिक सलाहकार थे। नेताओं के पीए को पार्टी में अहम जिम्मेदारी सौंपे जाने से कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। उनका कहना है कि यह गलत परंपरा है। पिछले तीस सालों से कांग्रेस के संगठन में काम कर रहे एक कार्यकर्ता ने कहा कि इसके बाद तो पार्टी कार्यकर्ता मैदान में काम करने के बजाय केवल गणेश परिक्रमा किया करेंगे।
कांग्रेस में पीए और ऑफिस के डाटा ऑपरेटर राष्ट्रीय पदाधिकारी बन गए