लखनऊ, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में फर्जी टिकटों के जरिये करोडों रुपये राजस्व की क्षति पहुंचाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर रोडवेज प्रबंधतंत्र ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दो क्षेत्रीय प्रबंधक समेत 14 कर्मचारियों को निलम्बित कर दिया तो वहीं 51 संविदा चालक-परिचालकों को बर्खास्त कर दिया। अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, सादाबाद रूटों पर चलने वाली करीब पचास बसों में फर्जी टिकटों के जरिये यात्रियों को यात्रा कराने तथा इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन (ईटीएम) में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का रोडवेज को नुकसान पहुंचाया गया। अलीगढ़ क्षेत्र में बीते दस साल से इस फजीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा था। प्रबंध निदेशक पी. गुरु प्रसाद ने इस मामले की जांच स्पेषल टास्क फोर्स (एसटीएफ) से करायी। बीते 21 अगस्त को एसटीएफ आगरा यूनिट व मुख्यालय के अधिकारियों की टीम ने संयुक्त अभियान में इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया। एसटीएफ की इस कार्रवाई में 11 रोडवेज व संविदाकर्मियों को जेल भेजा गया था।
रोडवेज के प्रवक्ता अनवर अंजार ने बताया कि प्रबंध निदेशक पी. गुरु प्रसाद के निर्देश पर अपर प्रबंध निदेशक ब्रह्म देव राम तिवारी की अध्यक्षता में अलीगढ़ फर्जीवाड़ा टिकट जांच के लिए एक कमेटी गठित की गयी थी। इसमें मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्रशासन) कर्मेंद्र सिंह, वित्त नियंत्रक स्मृतिलाल यादव, नोडल अधिकारी आगरा विद्यांशु कृष्ण, नोडल अधिकारी अलीगढ़ आशीष चटर्जी सदस्य थे। समिति ने सोमवार को जांच रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को सौंपी। प्रवक्ता ने बताया कि प्रबंध निदेशक ने इस मामले में दो आरएम समेत 14 कर्मचारियों को निलम्बित करने के साथ ही 51 संविदा चालक-परिचालकों को बर्खास्त किया। प्रवक्ता ने बताया कि अलीगढ़ व आगरा क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी व पीएस मिश्रा, मथुरा, हाथरस और बुद्धविहार डिपो (अलीगढ़) के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अक्षय कुमार, गोपाल स्वरूप शर्मा व योगेन्द्र प्रताप सिंह तथा अलीगढ़ व आगरा क्षेत्र के आधा दर्जन यातायात अधीक्षक आयुष भटनागर, हेमन्त मिश्रा, चक्कर, लक्ष्मण सिंह, अशोक सागर को निलम्बित किया गया। इतना ही नहीं तीन और रोडवेजकर्मियों मेघ सिंह, देवेन्द्र सिंह व मनोज को भी निलम्बित किया गया।
फर्जी रोडवेज टिकटों के मामले में 14 निलंबित, 51 बर्खास्त