पेट दर्द के लिए जिम्मेदार प्रोटीन बायोमार्कर की पहचान

ह्यूस्टन,वैज्ञानिकों ने 50 ऐसे प्रोटीन बायोमार्कर की पहचान की है, जिससे आसानी से तेज पेट दर्द या इंफ्लेमेट्री बाउल डिजीज का पता लगाया जा सकता है। आईबीडी के कारण डायरिया, पेट में मरोड़ और वजन में कमी की समस्या हो सकती है। अध्ययनकर्ता इन वैज्ञानिकों में भारतीय-अमेरिकी मूल के एक वैज्ञानिक भी शामिल है। अमेरिका के ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चंदर मोहन को अमेरिका के क्रॉन्स एंड कोलाइटिस फाउंडेशन से 3,47,490 अमेरिकी डॉलर का अनुदान मिला है। आईबीडी विशेषज्ञ शुभ्रा कुगातासन के साथ मिलकर मोहन, मल में मौजूद ऐसे प्रोटीन बायोमार्कर की जांच कर रहे हैं, जिससे बीमारी का पता चल सके। इससे पहले एक अध्‍ययन में बताया गया था कि पीपल का पेड़ जितना धार्मिक मान्यताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है उतना ही औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं होती है। इसलिए आज हम आपको पीपल के औषधीय गुणों के बारे में बताने जा रहे हैं। पेट दर्द में पीपल के पौधे की 2-5 पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसे 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर मिश्रण बना लें तथा इस मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर दिन में 3-4 बार सेवन से पेट दर्द में राहत मिलेगी। 3-4 ताजा पीपल की पत्तियों को क्रिस्टल चीनी में मिलाकर इसका पाउडर बना लें। इस पाउडर को 250 ग्राम पानी में मिलाकर मिश्रण को छान लें। इसे रोगी को 5 दिन तक दिन में दो बार दें। यह मिश्रण पीलिया रोग में अत्यंत प्रभावकारी साबित होता है। वैज्ञानिकों की माने तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और आंत की कोशिकाओं के बीच संतुलन नहीं बन पाने के कारण आईबीडी की समस्या पैदा होती है। दोनों ही बीमारियों में पाचन तंत्र में दर्द होता है।

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