जबलपुर,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जब भी घोटालों की बात होती है तो प्रधानमंत्री मौनी बाबा बन जाते हैं, उनके बोल तक नहीं फूटते। राफेल डील से हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की बू आ रही है फिर भी वे चुप हैं। शुक्ला ने सवाल उठाया कि ऐसी क्या वजह थी कि 526 करोड़ रुपये कीमत का राफेल लड़ाकू विमान 1670 करोड़ रुपये में खरीदने का सौदा किया गया, इसका जवाब पीएम नरेन्द्र मोदी को देश को देने चाहिए। नरेन्द्र मोदी ने राफेल डील नए सिरे से करके पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाया है। देशहित को दांव पर लगाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है।
श्री शुक्ला अपने जबलपुर प्रवास के दौरान होटल नर्मदा जैक्शन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताय कि राफेल घोटाला जनता तक ले जाने के उद्देश्य से कांग्रेस पार्टी ने देशभर में पत्रकारवार्ता का आयोजन किया है ताकि आम जनता को बताया जा सके कि किस तरह राफेल लड़ाकू विमान सौदे में बड़ा घोटाला किया गया है। श्री शुक्ल का आरोप है कि इस सौदे में पीएम ने मनमानी की है। यूपीए सरकार ने 126 राफेल विमान खरीदने के लिए 526 करोड़ रुपये प्रति विमान में सौदा किया था। 18 विमान फ़्रांस की राफेल डसॉल्ट एविएशन बनाकर देती, बाकी 108 विमान पब्लिक सेक्टर की कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भारत में बनाती जिससे वर्षों से विमान बनाने का अनुभव है। मगर मोदी सरकार ने यह काम रिलायंस डिफेंस को सौंप दिया जिसे विमान बनाने का अनुभव बिल्कुल नहीं है। श्री शुक्ल ने शब्दबाण छोड़ते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े रक्षा सौदे में भारत के साथ विश्वासघात करने की कला मोदी सरकार का मंत्र बन गई है। अब जब झूठ पकड़ा गया तो पूरी मोदी सरकार इस घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। श्री शुक्ल ने कहा कि लगता है कि चौकीदार अब भागीदार बन गया है।
राफेल पर विस्तृत जानकारी देते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 10 अप्रैल, 2015 को फ़्रांस में 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद की एकतरफा घोषणा के बाद हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दरकिनार कर दिया गया। इसका लाभ पूंजीपति मित्रों को हुआ। 30 हजार करोड़ रूपयों का ‘ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ एक निजी कम्पनी, यानि रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को मिल गया। मोदी सरकार ने 30 हजार करोड़ का ‘ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ एसेी कंपनी को दिये जाने की अनुमति क्यों दी, जिसे लड़ाकू जहाज बनाने का शून्य अनुभव है..? इस मामले में सरकारी कम्पनी, हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दरकिनार क्यों किया, जिसे लड़ाकू जहाज बनाने का दशकों का अनुभव है..? उन्होंने कहा कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस डिफेंस लिमिटेड ने यह दावा भी किया है कि उन्हें 30 हजार करोड़ रुपयों के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट के अलावा अतिरिक्त 1 लाख करोड़ रुपयों का लाईफ साइकल कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट भी मिल गया है। यदि राफेल लड़ाकू जहाज पब्लिक सेक्टर की कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में बनते, तो लाईपु साइकल कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट’ स्वतः ही हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को मिलता।