लखनऊ,उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का लखनऊ के हाई सिक्योरिटी जोन में बनने वाला होटल बनने से पहले ही विवादों में घिर गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विक्रमादित्य मार्ग पर हैरिटेज होटल पर झटका देते हुए उसके निर्माण पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से भी इस बारे में जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि हाई सिक्योरिटी जोन में होटल निर्माण की इजाजत कैसे दी गई? ये याचिका 17 अगस्त को दाखिल की गई थी जिस पर शनिवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये फैसला दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 5 सितंबर को की जाएगी। इसके बाद सवाल खड़ा होता है कि क्या मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन हाई सिक्योरिटी जोन में नहीं रहती। क्या उनकी सुरक्षा का शिवराज सरकार और हाईकोर्ट का कोई दायित्व नहीं बनता। क्योंकि बीते कुछ माह पहले ही राज भवन से कुछ ही दूरी पर बने मछली घर को तोड़कर सरकार यहां पांच सितारा होटल और कंवेंशन सेंटर बनाने जा रही है। इसके बाद हाई सिक्योरिटी जोन में बनाई जा रही यह पांच सितारा होटल पर हाईकोर्ट में याचिका दायर नही की जा सकती। क्या ये मुद्दा नहीं बन सकता। जिस तरह से यूपी में फैसला लिया गया है वैसे एमपी में नहीं लिया जा सकता। इसके बाद अब मप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की सिक्योरिटी पर भी सवाल खड़े हो रहे है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने इस संबंध में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में अखिलेश यादव,उनकी पत्नी सांसद डिंपल यादव, पिता मुलायम सिंह यादव, जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट सहित कुल 13 लोगों को पार्टी बनाया गया है। याचिकाकर्ता शिशिर चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि उनपर पीआईएल वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक,अखिलेश और डिंपल यादव ने होटल के नक्शे को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण में आवेदन किया है। ये सभी सम्पत्तियां समाजवादी पार्टी, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, डिम्पल यादव व जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट के कब्जे में हैं। न्यायालय ने याची को याचिका से अलग करने का भी निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले के याचिकाकर्ता शिशिर चतुर्वेदी को सुरक्षा देने के भी आदेश दिए हैं।
अखिलेश के होटल पर HC की रोक,अब 5 को फिर सुनवाई