सीबीएसई की गलती से फेल हुई मीनाक्षी, दोबारा जांच से बढ़े 400 फीसदी अंक

नई दिल्ली,परीक्षाओं में कॉपी जांचने में लापरवाही की शिकायते मिलना कोई नई बात नहीं है ऐसा ही एक मामला सामने आया है। 26 मई, 2018 को जब 12वीं का रिजल्ट आया तो जहां कई छात्र काफी खुश हुए, वहीं मीनाक्षी अपना रिजल्ट देखकर सदमे में आ गई। उसे इंग्लिश कोर में 16 नंबर मिले थे लेकिन मीनाक्षी ने हिम्मत नहीं हारी और वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई कर दिया। अब जो रिजल्ट सामने आया, वह कम चौंकाने वाला नहीं था क्योंकि उसके इंग्लिश में 80 नंबर आए थे यानी 400 फीसदी का फर्क था।
मीनाक्षी ने बताया- फेल होना तो दूर मेरे 80 नंबर आए थे। उन लोगों ने 64 अंक नहीं जोड़े थे इसलिए मुझे उस समय 16 नंबर मिले थे जो अब 80 हो गया है। पिछले साल की तरह ही इस साल भी मार्क्स का टोटल करने में सीबीएसई की गलती का दसवीं और बारहवीं के हजारों छात्रों को खामियाजा भुगतना पड़ा। वैसे तो बोर्ड अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि उनको मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए कितने आवेदन मिले या कितने और छात्रों का रिजल्ट रिवाइज किया जाना है लेकिन टीआईओ को किसी स्रोत से जानकारी मिली है कि इस साल कॉपी की दोबारा जांच के लिए 10,000 से ज्यादा आग्रह आए।
पिछले साल भी नंबर जोड़ने में सीबीएसई की गलती सामने आई थी। मुंबई के एक छात्र को 80 फीसदी से ज्यादा नंबर मिले थे लेकिन मैथ्स में उसका मार्क्स सिर्फ 50 था। दोबारा जांच के बाद उसका नंबर 90 हो गया। इसी तरह दिल्ली की एक छात्रा समीक्षा शर्मा का अंक 42 से बढ़कर 90 हो गया। पिछले साल की गलती को सुधारने के लिए इस साल बोर्ड ने एक ही उत्तरपुस्तिका दो जांचकर्ताओं को दिए थे लेकिन यह उपाय भी काम नहीं किया। 12वीं क्लास के छात्र अमित को भूगोल में सिर्फ 44 मार्क्स मिले जबकि बाकी विषय में 90 फीसदी। दोबारा जांच में पता चला कि उसके 51 मार्क्स नहीं जोड़े गए थे। इस 51 को जोड़ने पर उसका भूगोल में कुल अंक 95 हो गया। क्रिश को सोशल साइंस में सिर्फ 12 मार्क्स मिले थे दोबारा जांच में 59 आए। इसी तरह केमिस्ट्री में एक छात्र के 44 मार्क्स थे वेरिफिकेशन के बाद 95 हो गए इसी तरह उर्दू में एक छात्र को जीरो नंबर मिला था लेकिन दोबारा जांच में 37 नंबर आए।

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