भोपाल,प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि ई-टेंडर घोटाले जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया है कि जल निगम के ई-टेंडर घोटाले को दबाने के लिए ईओडब्ल्यू से जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि ई-टेंडरिंग घोटाला केवल जल निगम नहीं बल्कि दूसरे सरकारी विभागों तक फैला है। ने कहा कि जल निगम की नल-जल समूह योजना के तहत गांवों में पानी पहुंचाने के लिए बनी परियोजनाओं के तीन टेंडर की टेम्परिंग किए जाने से जिस घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, उसमें से दो परियोनजाओं का शिलान्यास प्रधानमंत्री इसी महीने करने वाले हैं। यह घोटाला जल निगम सहित पीएचई, जल संसान, महिला बाल विकास, पीडब्ल्यूडी, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, एमपी आरडीसी और एनवीडीए सहित कई दूसरे विभागों में भी फैले होने की आशंका है। ईओडब्ल्यू को इस घोटाले की जांच सौंपी गई है जबकि वह तकनीकी रूप से ऐसी जांच में सक्षम नहीं है। वह सरकार के अधीन भी है।घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार छह दिनों से मौन है और पूरा ई-प्रिक्योरमेंट सिस्टम कटघरे में खड़ा हो गया है। ई-टेंडरिंग सिस्टम में टेम्परिंग मामले को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर इसकी सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराई जाएगी। उन्होंने इस घोटाले को व्यापमं से बड़ा बताया और कहा कि मध्यप्रदेश का वाटरगेट कांड है। सरकार इस घोटाले में भी व्यापमं की तरह साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है। सिंह ने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान निर्माण भवन क्यों गए थे और वहां से संचालक की अनुपस्थिति में कुछ फाइल साथ ले गए। उन्होंने मांग की कि सरकार इसका खुलासा करे और वे कौन सी फाइलें थीं जो सुलेमान अपने साथ ले गए।नेता प्रतिपक्ष ने एक बयान में कहा कि जिस तरह सरकार ने व्यापमं घोटाले के असली अपराधियों को सामने नहीं लाया गया, उसी तरह ई-टेंडरिंग घोटाले में भी लीपापोती शुरू कर दी गई है।
एमपी में हुए ई-टेंडर घोटाले की सीबीआई से जांच हो : कमलनाथ