छिंदवाड़ा, पाताल में पानी लौटते ही जिले 90 फीसदी जलाशय सूख गए है। आलम यह है कि कुछ में तो मवेशियों के पीने लायक भी जल नहीं बचा है।इधर पीएचई ने भी जिले के 38 ग्रामों को संभावित जल विहीन मानते हुए पानी परिवहन का मसौदा तैयार कर लिया है।
कम बारिश और अप्रेल के बाद मई की तेज तपन के बीच भू जल स्तर 35 मीटर की गहराई पर पहुंच गया है। ऐसे में जिले के कुछ विकासखंडो में पेज जल की स्थिति संकट के मुहाने तक पहुंच गई है। आलम यह है कि पानी की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों को भी सड़क पर आकर आंदोलन करना पड़ रहा है। लेकिन विडम्बना इस बात है कि लोगों को पानी पिलाने के लिए जिले में संबधित विभागों की योजना कागजों से निकलकर अमल तक नहीं पहुच पा रही है। जबकि सरकारी आकडे खुद बता रहे है कि जिले में जल संकट गहरा चुका है।
10 फीसदी भी नहीं बचा पानी
जल संसाधन विभाग के आकडे बताते है कि जिले के129 जलाश्यों में से कन्हरगांव, तोतलाडोह, सारोठा जैसे कुछ जलाशयों को छोड दिया जाए तो बांकी में पानी जलाशयों की तली से लग गया है। वहीं कुछ पूरी तरह सूख चुके है। वहीं निस्तारी तालाबों के हाल भी इसी तरह है। ऐसे में न तो ग्रामीणों को निस्तार के पानी मिल पा रहा है और न ही मवेशियों की प्यास बुझ पा रही है।
इन ग्रामों में होगा परिवहन
पीएचई विभाग ने सर्वे के बाद जिन ग्रामों का जल परिवहन के लिए चयन किया है उनमें पांढुर्णा, चौरई, बिछुआ, परासिया, तामिया, अमरवाड़ा, हरई के 38 ग्रामों में कामठी खुर्द,कोलीखापा,आवास,लेहराढ़ाना, चिचौलीढ़ाना, सिवनी, पठारा, दिघौरी, बड्डारैय्यत, मगजगावं, पटेलढ़ाना, पठारढ़ाना, ढ़ाना, ढ़ाना, हसनपुर, खुटिया, डोला पांजरा,धमनिया,अकलमा,भमोडी, अंबाड़ा, इकलेहरा, जाटाछापर,घोघरी रैय्यत, भाजीपानी, चोरापठार,थोडढ़ाना, पथरकटी,िभलमाढ़ाना, बाराहीरा,िबल्हेरा,गढाढ़ाना, सिरोंज, मेंहदा, कूकरपानी,बोरिया, छातासुई,पडरभटा शामिल है। हालांकि इनमें से कुछ ग्रामों में पीएचई ने हैंडपंप स्थापित करने की योजना भी बना रखी है विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि इसके बाद भी जरूरत पड़ती है तो जल परिवहन किया जाएगा।
निरीक्षण कर रहे एसई
जिले में जलसंकट का जायजा लेने पीएचई विभाग में भोपाल इएनसी से एसई एके जैन छिंदवाड़ा पहुंचे है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वह जलआभाव ग्रस्त ग्रामों की जो सूची तैयार की गई है एसई उन ग्रामों में पहुंच कर स्थिति का जायजा ले रहे है। उनके निरीक्षण के उपरांत तैयार की गई रिपोर्ट कलेक्टर को सौपी जाएगी। इसके बाद पानी परिवहन के लिए दर निर्धारित की जाएगी।
सूख गए जलाशय मवेशियों के लिए भी नहीं बचा पानी 38 ग्रामों में परिवहन की तैयारी