मण्डला , एक ऐसा जिला जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की संभावनाओं में शून्यता ही रहा करती थी पर आज वही जिला शिक्षा के क्षेत्र में कुछ इस तरह आगे बढ़ा है कि अब सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी इंजीनियर और डॉक्टर बनने जा रहे हैं। आर्थिक परिस्थितियों से कमजोर और बिना किसी संसाधन के पढ़ने वाले आदिवासी वर्ग के विद्यार्थी अब आईआईटी, जेईई और एआईपीएमटी जैसी परीक्षाओं को पास कर इंजीनियर और डॉक्टर बनने की पढ़ाई करने जा रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आदिवासी वर्ग के विद्यार्थी एआईपीएमटी और जेईई जैसी परीक्षाओं को पास कर देश के चुनिन्दा शिक्षण संस्थानों में अपनी उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने जा रहे हैं। जहां बडे बडे शहरों के बडे बडे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे जो लाखों रूपये खर्च कर इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और एक बार में परीक्षा पास करने में सफल नहीं हो पाते वहीं आदिवासी जिले के होनहार आदिवासी विद्यार्थी सरकारी स्कूल में पढ़कर भी पहली बार में ही इन परीक्षाओं को पास कर लेते हैं। यह सब इतना आसान भी नहीं है पर इस मुश्किल को आसान करने वाले एक आईएएस अधिकारी ने इस जिले के लिये कुछ ऐसा किया कि गरीब परिवार के बच्चे भी अब आसानी से डॉक्टर, इंजीनियर बन रहे हैं। मण्डला जिले में वर्ष 2013 से 2016 तक जिला कलेक्टर के रूप में पदस्थ रहे लोकेश जाटव ने अपने कार्यकाल में जिले की शिक्षा व्यवस्था का कुछ इस प्रकार सौन्दर्यीकरण किया कि आज उस सौन्दर्य की चमक जिले के आदिवासी बच्चों के चेहरे में देखने को मिलती है। नवरत्न उत्कृष्ट विद्यालय से लेकर प्रोजेक्ट 100 कलाम को ज्ञानार्जन के अंतर्गत समाहित किया गया और इनमें पढ़ने वाले बच्चे भी दी जाने वाली सुविधाओं के अनुरूप अपना प्रतिभा कौशल दिखाने लगे। इस वर्ष जेईई मेन्स परीक्षा में फिर से हमारे जिले के विद्यार्थी कमाल कर गये हैं। जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 71 विद्यार्थियों ने जेईई मेन्स में अपनी जगह बनाई है। इनमें से 2 बैगा जनजाति के विद्यार्थी हैं । विगत वर्ष 64 विद्यार्थियों ने यह कमाल किया था इस वर्ष ज्यादा विद्यार्थी सफल हुए हैं। हो हौसला तो मजिलें खुद पास आती हैं इन्हीं पक्तियों को जिले के होनहार विद्यार्थियों ने साबित करके दिखाया है। आने वाला समय अपने साथ और भी बडी उपलब्धियों को लेकर आयेगा क्योंकि हमारे इस जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। चयनित विद्यार्थियों मे से विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) से 02,अनुसूचित जनजाति 48, अनुसूचित जाति से 8, अन्य पिछड़ा वर्ग से 12 विद्यार्थी चयनित हुए हैं। हेमवती भारतीया, गोविंद , अरविंद परते, हरिओम मार्क मनीष कुमार सैय्याम, निलेश कुमार मसराम, सचिन शाह, एकेश रायकर, लक्ष्मी धौरी, मोहित कुमार, संजय धुरी, संजय सैय्याम, रविता मरावी, विष्णु पैरटे, शिवेंद्र मार्को, सुनील ज्ञन्क्।च्म्, पुरूषोत्तम, अंकित कुमार साहू, स्मिता पटेल, मुस्कान चौरसिया, श्वेता , महूलाल, वासुदेव मारवी, विजय कुमार, अहिशिक, विवेक ठाकुर, दीलीप कुमार, दीपक सैय्यम, मनीष कुल्स्ते, नीलाम सिंह, तेंदेंद्र पुष्म, नवनीत मारवी, हरवंश मसराम, अनुसूया मारवी, काजल चक्रवर्ती, अनिश सिंह, विकास कुमार, गुलजार सिंह, राज कुमार सैय्यम, संदेप कुमार, आशा वार्काडे, आशीष कुमार, महेंद्र सिंह, सुरेश कुमार सोयाम, राकेश कुमार पैरटे, संतोष कुमार यूकी, मोहित कोरी, सोनम झारिया, मनीष धौरी, रवि शंकर, उमेश कुमार पैंड्रो, हंसराम, जय दहिया, राहल ग्यार, साकेत सिंह, शुभम मार्को, कानियाया भोरिया आदि विद्यार्थी चयनित हुए हैं।
चयनित छात्र-छात्राओं को कलेक्टर ने दीं शुभकामनाऐं
बुधवार को कलेक्टर सूफिया फारूखी वली ने स्थानीय नवरत्न विद्यालय में जाकर जेईई मेन्स में जिले की विभिन्न शालाओं में अध्यनरत पास आऊट 71 छात्रों से भेंट कर सफलता के लिये शुभकामना देते हुये जेईई एडवांस की तैयारी के लिये आवश्यक जानकारी दी। जिसमें उन्होंने कहा कि सभी बच्चे पॉजीटिव सोच रखते हुये शांत मन से पेपर दें। सैल्फ स्टडी पर जोर देते हुये अधिकतम सिलेबस अधारित सम्पूर्ण तैयारी परीक्षा के पहले कम से कम दो-तीन रिवीजन करें। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से निर्देशित किया कि चूंकि अभी भीषण गर्मी का दौर जारी है जिसमें बीमार होने की पूरी संभावना है, इसलिए पर्याप्त शुद्ध पानी का उपयोग करते हुये ओआरएस साथ में रखें भोजन के साथ यथा संभव दही का प्रयोग करें, मोबाईल और सोशल मिडिया से दुरी बनाये रखें। सिलेबस पर ध्यान केन्द्रित करते हुये उन्होंने अर्जुन का उदाहरण देते हुये कहा जैसे अर्जुन को अपने लक्ष्य के रूप में सिर्फ पक्षी की ऑख नजर आ रही थी उसी तरह आप भी अपना ध्यान पूरी तरह पढ़ाई की ओर लगाएं। बच्चों से चर्चा के दौरान उन्होंने संस्था से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की जानकारी ली जिसमें शिक्षक नियमित कक्षाएं की जानकारी ली जिससे सभी बच्चे की गई व्यवस्थाओं से संतुष्ट पाये गये। चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सभी बच्चों के पास दिमाग एक समान होता है लेकिन कुछ बच्चे बहुत आगे बढ़ जाते है और कुछ असफल हो जाते है ये सिर्फ आपके द्वारा की जाने वाली मेहनत का ही अंतर है क्योंकि जिनका न्यूरॉन स्ट्रांग होता है तो उनकी मेमोरी भी अच्छी रहती है। इसके लिये आप याद की गई चीजों को अधिकतम लिख-लिखकर प्रेक्टिस करें जिससे पेपर के 3 घंटे की अवधी में सम्पूर्ण प्रश्न पत्र को बिना छोड़े हल किया जा सके। आगे उन्होंने बच्चों के पेरेंट्स से भी जानकारी लेते हुये कहा कि आप भी इस अवधी में कम से कम मिले आवश्यकता पड़ने पर बच्चे आप से स्वयं मिलेगें। क्योंकि अगली तैयारी के लिये बच्चों के पास सिर्फ 20 दिन रह गये है, इन दिनों में बच्चे स्वयं अपने उज्जवल भविष्य संवारने के लिये कठिन परिश्रम कर रहे है। ऐसे में आपकी सिर्फ दुआएं ही उन्हें सफलता की ओर अग्रसर कर सकती है। अंत में बच्चों से कहा की आवश्यकता पड़ने पर आप मुझ से व्यक्तिगत भी भेंटकर अपनी समस्याओं से अवगत करा सकते है। मेरा पूरा प्रयास होगा कि मै अधिकतम आपके काम आ सकूं।
जेईई मेन्स में चयनित हुए सरकारी स्कूल के 71 विद्यार्थी