नई दिल्ली,पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिकी कमांडो ने जिस आधुनिक लेजर गाइडेड एम-4 ए-1 कार्बाइन का इस्तेमाल किया था, उसी कार्बाइन से भारतीय सेना के जांबाज मलेशिया के घने जंगलों में अचूक निशाना साधेंगे। भारतीय सेना के पास अभी यह आधुनिक और मारक कार्बाइन नहीं है। माना जा रहा है कि यह आधुनिक कार्बाइन जल्द ही भारतीय सेना को मिल सकती है। परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद की जिस चार ग्रेनेडियर्स यूनिट ने सन-1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे, वही यूनिट मलेशिया में पहली बार होने वाले संयुक्त युद्धाभ्यास हरीमऊ शक्ति 2018 में अपना जौहर दिखाएगी। मध्य कमान के अंतर्गत स्थापित एक ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट से इस यूनिट को युद्धाभ्यास के लिए प्रारंभिक रूप से तैयार किया जा रहा है। रात के समय अपने निशाने को साधकर 600 मीटर की दूरी तक उसे नेस्तनाबूत करने में सहायक लेजर गाइडेड तकनीक वाली यह कार्बाइन 700 से लेकर 950 राउंड प्रति मिनट की तेजी से गोलियां बरसा सकती है। मलेशिया में पहली बार होने वाले संयुक्त युद्धाभ्यास हरीमऊ शक्ति 2018 के लिए चार ग्रेनेडियर्स को चुना गया है। यह संयुक्त युद्धाभ्यास 30 अप्रैल से 13 मई तक दो चरणों में होगा। पहले चरण में क्रास ट्रेनिंग होगी, जबकि दूसरे चरण में फील्ड ट्रेनिंग में भारतीय सेना अपने कौशल का प्रदर्शन करेगी। मलेशिया की एक रॉयल रेंजर रेजीमेंट के 113 जवान इस युद्धाभ्यास में हिस्सा लेंगे। इस रेजीमेंट को जंगल वारफेयर में महारत है। दोनों देशों की सेनाएं घात लगाए दुश्मनों को ढूंढना और उनको नेस्तनाबूत करना, शिविरों पर हमला, घात लगाना, जंगल में बिना किसी खानपान की सामग्री के जीवित रहकर ऑपरेशन पूरा करने, सूचनाओं को एकत्र करना और विस्फोटकों को हैंडल करने का प्रदर्शन करेंगी।
भारतीय सेना को मिल सकता है वह हथियार, जिससे मारा गया था लादेन