SC/ST एक्ट का उपयोग डराने के लिए नहीं करने देंगे, बेगुनाह को सजा नहीं होने देंगे

नई दिल्ली,सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 1989 (एससी-एसटी एक्ट) से जुड़े अपने फैसले में बदलाव से साफ इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि हमने एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों को छुआ भी नहीं है, सिर्फ तुरंत गिरफ्तार करने की पुलिस की शक्ति पर लगाम लगाई है। केस दर्ज कराने, मुआवजा देने के प्रावधान बेअसर हैं। कोर्ट ने दो दिनों के अंदर सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अब मामले की सुनवाई 10 दिन बाद होगी। कोर्ट ने कहा है कि गिरफ्तार करने की शक्ति सीआरपीसी से आती है, एससी-एसटी कानून से नहीं। हमने सिर्फ इस प्रक्रियात्मक कानून की व्याख्या की है, एससी, एसटी एक्ट की नहीं। कोर्ट ने कहा हम हंगामा नहीं चाहते।
कोर्ट के बाहर क्या हो रहा, हमें मतलब नहीं?
दो अप्रैल को हुए भारत बंद पर कोर्ट ने कहा, बाहर क्या हो रहा है, हमें इससे मतलब नहीं है। हम सिर्फ कानून का पक्ष देखेंगे। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों न्यायमूर्ति यूयू ललित और एके गोयल की बेंच ने कहा है कि वह इस एक्ट के खिलाफ नहीं है, लेकिन निर्दोषों को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
हमें निर्दोष लोगों की चिंता
केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जो लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्होंने हमारा फैसला पढ़ा भी नहीं है। हमें उन निर्दोष लोगों की चिंता है, जो जेलों में बंद हैं।
यह फैसला प्रभावी रहेगा
20 मार्च को दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एससी, एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर सवाल उठाते हुए तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। पहल अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक कानून-1989 में पीडि़त पक्ष के शिकायत कराते ही कार्रवाई और गिरफ्तारी का प्रावधान है। ऐसे मामलों में आरोपियों को अग्रिम जमानत भी नहीं दी जा सकती है। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में सुनवाई के बाद ही जमानत संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई है।
इधर सड़क पर उपद्रव जारी
भिंड में मंत्री आर्य व सांसद भागीरथ प्रसाद के घर पथराव
मध्यप्रदेश के तीन शहरों मुरैना, भिंड, ग्वालियर में कफ्र्यू
भोपाल में सोशल मीडिया पर धारा 114 लागू
भिंड में मंगलवार सुबह खेत में मिली एक और लाश
कई राज्यों में मंगलवार को भी स्कूल-कॉलेज बंद रहे
केंद्र ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और बिहार से हिंसा पर रिपोर्ट मांगी
मंगलवार को भी मध्यप्रदेश के मुरैना, भिंड, ग्वालियर में जमकर हिंसा और आगजनी, तोडफ़ोड़ की। भिंड में मृतकों का आंकड़ा 4 पहुंच गया। यहां खेत में एक लाश मिली। वहीं मंत्री लालसिंह आर्य के बंगले पर भी पथराव किया गया है। भिंड में लोगों की शिकायत पर दो पुलिस वालों पर हत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। डेढ़ सौ से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। भिंड, मेहगांव और गोहद में फायरिंग हुई। मछंड, मेहगांव में गोली से दो लोगों की मौत हो गई। मेहगांव में यात्रियों को उतारकर बस में आग लगा दी। एसडीएम अनिल बनवारिया, एसआई दीपक यादव, भिंड में सिपाही योगेश दीक्षित पत्थर लगने से घायल हैं। भिंड में भाजपा सांसद डॉ भागीरथ प्रसाद के घर में पथराव हुआ। हिंसक स्थिति काबू करने कलेक्टर इलैया राजा टी ने भिंड शहर, मेहगांव, गोहद, लहार और मछंड में अनिश्चितकाल के लिए कफ्र्यू की घोषणा की है। जिलेभर में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने की शांति की अपील
कानून व्यवस्था की समीक्षा
भोपाल पुलिस ने सुबह कानून-व्यवस्था को लेकर समीक्षा की। साथ ही दोपहर को संवेदनशील क्षेत्रों में मार्च निकाला। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने निवास पर पुलिस एवं प्रशासन के चुनिंदा अफसरों से चर्चा की। इसके बाद कैबिनेट में इस मसले पर चर्चा हुई। यहां बता दें कि ग्वालियर-चंबल प्रशासन को आंदोलन के विकराल होने की आंशका 1 अप्रैल को भाजपा के किसान सम्मेलन से ही थी। इसकी सरकार को इत्तला भी दी गई, लेकिन राजनीतिक दबाव में मैदानी अफसरों की बात को नजरअंदाज किया गया।
सोशल मीडिया वाले सतर्क रहें
प्रशसान ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने, उसे लाइक करने या फिर कमेंट करने के साथ ही फारवर्ड करने के मामले में धारा 144 लगाकर प्रतिबंध लगा दिया है। व्हॉट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर सहित अन्य सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे वाले मैसेज प्रसारित करने पर कार्रवाई होगी। विवादित पोस्ट की फारवर्ड, लाइक, कमेंट पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह 2 जून तक प्रभावी रहेगी।
दलितों के पक्ष में आरएसएस
आरएसएस ने दो टूक कहा है कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम पर आए उच्चतम न्यायालय के निर्णय से उसका कोई संबंध नहीं है। इस बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा है जो आधारहीन व निंदनीय है। संघ के सर कार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने कहा कि संघ जाति के आधार पर किसी भी भेदभाव अथवा अत्याचार का सदा विरोध करता है। इस प्रकार के अत्याचार को रोकने के लिए बनाए गए कानून का कठोरता से पालन होना चाहिए। जोशी ने एक बयान जारी कर कहा है कि जाति के आधार पर किसी भी प्रकार के अत्याचार को रोकने के लिए बनाए गए कानूनों का कठोरता से पालन होना चाहिए और समाज का हर वर्ग किसी बहकावे में आए।
नकारात्मक राजनीति कर रही है कांग्रेस: शाह
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि एसटी-एससी एक्ट पर कांग्रेस नकारत्मक राजनीति कर रही है। अमित शाह ने ट्वीट किया जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है उसने दलितों को मजबूत करने का काम किया है। शाह ने कहा जनता के द्वारा नकारी जा चुकी पार्टियां अब दलितों का इस्तेमाल कर फिर से सत्ता में आने के सपने देख रही हैं। शाह ने कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मज़ाक उड़ाती है। कांग्रेस ने खुद बाबा साहेब अंबेडकर को दो बार नजऱअंदाज किया।

 

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