अलीगढ़, करीब साढ़े तीन साल पहले AMU से जम्मू-कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए भेजे गए एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि की जांच कराये जाने की मांग जोर पकड़ रही है। यह पैसे एएमयू के शिक्षकों ने अपने वेतन से कटाए थे। छात्र एवं कर्मचारियों ने भी जरूरी खर्चों में कटौती कर पैसे बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जुटाए थे। विश्वविद्यालय के शिक्षकों को संदेह है कि कहीं यह धन कश्मीर के गलत लोगों के हाथ में तो नहीं पहुंच गया। शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर आने के बाद बाढ़ राहत फंड की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग एक बार फिर शुरू हो गई है। पिछले साल इसकी शिकायत सीबीआई के निदेशक से की गई थी। जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आने एवं भयानक तबाही होने से दुखी एएमयू के शिक्षकों ने सितंबर 2014 में अपने एक दिन का वेतन कटवाकर मदद के लिए भिजवाया था। इसके अतिरिक्त यहां के छात्रों एवं कर्मचारियों ने भी दिल खोल कर मदद की थी।
एएमयू टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी स्वयं जाकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन एएमयू के अधिकारी इस मामले में सक्रिय हो गए। इसको लेकर तत्कालीन कुलपति जमीरउद्दीन शाह, पीवीसी सैयद अहमद अली और अमुटा के नेताओं के बीच घमासान भी हुआ था। एक साल तक कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों की मदद नहीं होने पर विवाद ने काफी विकराल रूप धारण कर लिया। बाद में एएमयू प्रशासन द्वारा बताया गया कि करीब 1.10 करोड़ की धनराशि 100 बाढ़ पीड़ितों के खाते में भेज दी गई, ताकि वह इस धनराशि से अपने घर फिर से बना लें।
AMU से कश्मीर को भेजी गई राहत राशि की जांच की उठी मांग