वेदांता ने इलेक्ट्रोस्टील के लिए लगाई 4500 करोड़ की बोली

मुंबई,अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता रिसोर्सेज ने दिवालिया हो चुकी इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स लिमिटेड के लिए सबसे बड़ी बोली लगाई है। सूत्रों के अनुसार वेदांता की बोली टाटा ग्रुप की बोली से कहीं ज्यादा है। सूत्रों के अनुसार वेदांता ने 4500 करोड़ रुपए की बोली लगाई है। उन्होंने बताया कि दिवालिया हो चुकी इस कंपनी के लिए अभिषेक डालमिया के रेनेसां ग्रुप और इडलवाइज के सपोर्ट वाले एक विदेशी फंड ने भी बोली लगाई है।
बताया जाता है कि वेदांता ने 4500 करोड़ रुपए की बोली लगाई। एक व्यक्ति ने बताया कि इसमें ‘कुछ और बढ़ोतरी’ की जा सकती है। टाटा ग्रुप ने करीब 3500 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। पक्षों की ओर से दिए गए ऑफर की पुष्टि नहीं की जा सकी है। पीडब्ल्यूसी ने एक ईमेल में बताया कि यह प्रक्रिया इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के अनुसार चलाई जा रही है। पीडब्ल्यूसी के धैवत अंजारिया इलेक्ट्रोस्टील के इनसॉल्वेंसी प्रोसेस के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल इंचार्ज हैं। वेदांता और टाटा ने इस संबंध में सवालों के जवाब नहीं दिए।
सूत्रों ने बताया कि वेदांता और टाटा ने ऑल-कैश ऑफर दिए हैं। इलेक्ट्रोस्टील पर फाइनेंशियल क्रेडिटर्स ने करीब 10000 करोड़ रुपये का क्लेम किया है, जो ब्याज और जुर्माने को जोड़कर 13000 करोड़ रुपए बन रहा है। इस तरह वेदांता के ऑफर को स्वीकार करने पर लेंडर्स को 55 फीसदी कम रकम से संतोष करना होगा, वहीं टाटा की बोली स्वीकार होने पर उन्हें 65 फीसदी हेयरकट बर्दाश्त करना होगा। कोई लोन सेटल करने में लेंडर जितनी रकम नहीं वसूल पाते हैं, उसे हेयरकट कहा जाता है।
एसबीआई लीड बैंक है और आरबीआई के निर्देश पर वही पिछले साल जुलाई में इलेक्ट्रोस्टील का मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में ले गया था। क्रेडिटर्स की कमेटी की बैठक बुधवार को होगी, जिसमें चारो बिडर्स के रिजॉल्यूशन प्लान पर विचार किया जाएगा। अगले कदम के बारे में फैसला किया जाएगा। टाटा ग्रुप के पास तो स्टील बिजनेस है, लेकिन दूसरों के पास नहीं है। वेदांता के पास आयरन ओर बिजनेस है और उसका ऑफर स्वीकार किया गया तो वह स्टील निर्माण में कदम रखेगा। लेंडर्स इन ऑफर्स का असेसमेंट तय मानकों पर करेंगे। इसके तहत फाइनेंशियल प्रोजेक्शंस की प्रैक्टिकलिटी, संकट में फंसी कंपनी को उबारने में बिडर की क्षमता और उसके फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड को देखा जाएगा। इसके अलावा रिजॉल्यूशन प्लान के तहत अपफ्रंट कैश रिकवरी, अपफ्रंट कैश रिकवरी में नेट प्रेजेंट वैल्यू, इक्विटी अपसाइड और कारोबार सुधारने के लिए फ्रेश इक्विटी इन्फ्यूजन पर गौर किया जाएगा। इलेक्ट्रोस्टील उन 12 कंपनियों में शामिल है, जिनके मामले जून में आरबीआई ने तुरंत बैंकरप्सी कोर्ट में ले जाने का निर्देश बैंकों को दिया था।
इससे पहले लेंडर्स ने स्ट्रैटेजिक डेट रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम के तहत इलेक्ट्रोस्टील को रिवाइव करने की कोशिश की थी। इसके तहत कर्ज का एक हिस्सा इक्विटी में बदला जाता है और उसे स्ट्रैटेजिक इनवेस्टर्स के हाथ बेचा जाता है। हालांकि कंपनी को फर्स्ट इंटरनेशनल के हाथ बेचने की डील इस चिंता को देखते हुए रद्द कर दी गई थी कि इससे प्रमोटरों केजरीवाल परिवार का कंपनी पर दोबारा कंट्रोल हो जाएगा।

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