कमिश्नर, कलेक्टर मिलकर राजस्व की शिकायतों की संख्या शून्य करने का लक्ष्य तय करें

भोपाल,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अविवादित नामांतरण, बँटवारा एवं अन्य राजस्व प्रकरणों संबंधी शिकायतों की संख्या शून्य करने का लक्ष्य तय करते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संबंधी शिकायतों की संख्या शून्य करने के लिये क‍मिश्नर और कलेक्टर समन्वय बनाकर काम करें। यह सुशासन का संकेतक है। चौहान ने इस अवसर पर नयी नामांतरण पंजी का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री चौहान ने आज यहाँ मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक में राजस्व विभाग की गतिविधियों की संभागवार समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्व प्रकरणों के बेहतर निराकरण से राज्य की छवि का निर्माण होता है। चौहान ने कहा कि हर घर में खसरा-खतौनी की नकल पहुँच जाना चाहिये। भू-अर्जन प्रकरणों की मुआवजा राशि का भी त्वरित निराकरण करें। राजस्व संबंध सभी रिकार्ड अपडेट रखें।
चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि 30 सितम्बर तक केन्द्र सरकार के सूखा मेन्यूअल-2016 के मानदंडों के अनुसार जिलों से सूखे की रिपोर्ट तैयार करें। इसके अंतर्गत कम वर्षा, लगातार चार हफ्तों तक अवर्षा, भूमि की नमी में कमी, भूजल स्तर की कमी, बोनी का क्षेत्रफल कम रह जाना, जलाशयों में जल स्तर की कमी जैसे मानदण्डों के आधार पर जिले में सूखे की स्थिति का आकलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद ही प्रभावित जनसंख्या की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सर्वेक्षण संभव होता है। चौहान ने कम वर्षा की स्थिति देखते हुए उपयुक्त फसलों की बोनी के संबंध में योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होने राहत की व्यापक कार्य-योजना बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि इसके लिये ज्यादातर धनराशि राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के अंतर्गत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिये राज्य के अपने संकेतक और मानदण्ड होना चाहिये। सूखा प्रबंधन केन्द्र बनाकर उसे यह जिम्मेदारी सौंपना चाहिये। इस दिशा में प्रयास किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूखे की स्थिति का आकलन करने की विश्वसनीय व्यवस्था स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने संभागायुक्तों को निर्देश दिये कि किसानों के व्यापक हित में उदारतापूर्वक राहत देने के लिये सर्वेक्षण करवायें। जिला कलेक्टरों से समन्वय स्थापित कर उन सभी जिलों के लिये कार्य-योजना बनायें, जहाँ बोनी नहीं हो पाई है और वहाँ के प्रभावित किसानों के लिये ज्यादा से ज्यादा राहत उपलब्ध कराने का प्रयास करें। बैठक में बताया गया कि चम्बल, ग्वालियर और सागर संभागों के जिले ज्यादा प्रभावित हुये हैं जबकि मालवा और महाकौशल के जिलों में औसत वर्षा हुई है।

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