पटना,बिहार के 19 कांग्रेसी विधायकों ने साफ कर दिया है कि वे राहुल गांधी का आदेश नहीं मानेंगे और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से गठबंधन तोड़ लेंगे। इस नए घटनाक्रम के बाद बिहार के सियासी हलकों में चर्चा है कि बिहार कांग्रेस अशोक चौधरी के नेतृत्व में दो फाड़ हो सकती है।
बागी होने की कगार पर पहुंचे विधायकों का कहना है कि लालू प्रसाद यादव कभी भी कांग्रेस के विश्वस्त नहीं रहे। लालू ने मुस्लिम और यादव वोटरों को अपने पाले में रखने के लिए अक्सर उच्च तबके की जातियों को नजरअंदाज किया। इस वजह से पिछले 20 वर्षों में कांग्रेस अच्छा नहीं कर पाई। बिहार कांग्रेस में विभाजन के लिए 19 विधायकों का संख्या पर्याप्त है और अलग होने पर इन विधायकों की सदस्यता भी नहीं जाएगी। कानूनन इन विधायकों को अलग गुट या पार्टी बनाने के लिए 18 विधायकों का समर्थन जरूरी है। इससे कांग्रेस नेतृत्व में बेचैनी बढ़ गई है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में कांग्रेस के 27 विधायक और 6 विधान पार्षद हैं। इस सियासी तूफान के बीच बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा है कि कांग्रेस कार्यसमिति के कुछ वरिष्ठ नेता उन्हें पद से हटाने की साजिश कर रहे हैं। बगावती तेवर दिखाते हुए अशोक चौधरी ने राहुल गांधी के साथ होने वाली मीटिंग में शिरकत नहीं की।
चर्चा यह भी है कि अशोक चौधरी को 14 कांग्रेसी विधायक और चार विधान पार्षदों का समर्थन है। यदि चार विधायक चौधरी के पाले में जाते हैं तो वे अपनी विधायकी बचाने में कामयाब हो जाएंगे। सियासी पंडितों का भी कहना है कि कांग्रेसी विधायकों को ललचाने के लिए नीतीश ने अपनी कैबिनेट में आठ जगह खाली छोड़ रखी है।
अशोक चौधरी के नेतृत्व में टूटेगी बिहार कांग्रेस ?