मधुमक्खी के छत्ते से बनेगी हेपेटाइटिस की दवा

ग्वालियर, जीवाजी विश्वविद्यालय के छात्रों ने शोध करके ऐसी दवा तैयार की है, जिससे हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हो सकेगा। यह दवा मधुमक्खी के छत्ते से मिलने वाले एंटी बैक्टीरियल तत्वों (प्रोपॉलिस) से तैयार की गई है। विश्वविद्यालय ने इस दवा को पेटेंट कराने का भी फैसला लिया है।
मधुमक्खी के छत्ते के प्रोपॉलिस में मिलने वाले इन तत्वों की पहचान विश्वविद्यालय की शोधार्थी डॉ. मोनिका भदौरिया ने नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी की हाई परफॉर्मेंस लिम्डि क्रोमेटोग्राफी के जरिए की थी। इसके बाद जम्मू स्थित नेशनल रिसर्च लेबोरेटरी में लिवर पर असर करने वाले हानिकारक पदार्थों पर प्रोपॉलिस के असर का अध्ययन किया गया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने बताया कि इस फॉर्मूले को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही हमें इसके लिए पेटेंट मिल जाएगा।
चूहों के लिवर पर किया प्रयोग
दवा का प्रयोग चूहों के लिवर पर भी किया गया। लिवर सायरोसिस, हेपेटाइटिस और पीलिया जैसी बीमारियों में उपयोग की जाने वाली दवाओं के साथ भी इसकी तुलना की गई तो प्रोपॉलिस के परिणाम सकारात्मक मिले हैं।
कैंसर के इलाज में भी कारगर
इस दवा से हेपेटाइटिस के अलावा लिवर सायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भी संभव है। प्रोपॉलिस पर विश्वविद्यालय की कुलपति के मार्गदर्शन में शोध करने वाली डॉ. भदौरिया का कहना है कि प्रोपॉलिस में 300 एंटी बैक्टीरियल तत्व रहते हैं। कैंसर के इलाज में होने वाली कीमोथैरेपी में कुछ साइड इफेक्ट्स होते हैं, जैसे- बालों का झड़ना आदि को भी प्रोपॉलिस से रोका जा सकता है।
सिक्योरिटी फीचर ने दिया आइडिया
मधुमक्खी जब छत्ता बनाती है तो उसमें वैक्स के बीच में कुछ गैप रह जाता है। इस जगह को मधुमक्खी फूलों के परागकणों से लिए गए प्रोपॉलिस से भरती है। प्रोपॉलिस में एंटी बैक्टीरियल तत्व म्ेरिसिटिन, रुटिन, सिनेमिक एसिड, इलैजिक एसिड, रेसवरसोट्रोल के साथ-साथ एस्टर, एल्डिहाइड और कीटोन्स होते हैं। रानी मक्खी जब अंडा देती है तो यही एंटी-बैक्टीरियल तत्व उसकी वायरस से रक्षा करते हैं। इसी सिक्यूरिटी फीचर ने शोध का आइडिया दिया। शोध के बाद इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

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