कार्टूनिस्ट लहरी ने अंग्रेजी अंकों से बनाए कार्टून केरेक्टर

इन्दौर, मशहूर कार्टूनिस्ट इस्माईल लहरी की पांच दिवसीय कार्टूनशाला का आगाज रविवार सुबह हुआ। इंदौर प्रेस क्लब और संस्था कारीगरी द्वारा आयोजित इस कार्टूनशाला में सौ से ज्यादा बच्चे भाग ले रहे है। कार्टून की विधा को एक रोचक और अलग अंदाज में सिखने की ललक भाग ले रहे बच्चों में देखने को मिला। लहरी ने इस मौके पर कहा कार्टून क्यूट तो होता ही है पर व्यवस्था पर तंज कसने का एक सशक्त माध्यम भी होता है। बिना कुछ कहे हालात और परिस्थितियों को बयां करने की ताकत कार्टून में ही होती है। बात आर के लक्ष्मण की हो या रंगा की यह वे नाम है जिन्होंने देश की तात्कालिन समस्याओं पर ना सिर्फ ध्यान आकर्षित किया बल्कि उसके सुधार में भी अपना महत्वपूर्ण रोल प्ले किया है। लहरी ने कार्टून विधा पर बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ लाईनों के जरिए चित्रों को उकेरना भर नहीं है, अपनी स्मृति में छाए हुए चेहरे को आकार देने का काम है। कुछ पहचान होती है चेहरे में उस पहचान को उकेरने भर से व्यक्ति की पहचान हो जाती है, जैसे गांधी जी के सर की गोलाई और चश्मा, या फिर नेहरू जी की टोपी और नाक बस इतनी रेखा ही उनके स्वरूप को सामने ला देती है।
लहरी ने बच्चों से अंग्रेजी के 1 से 10 तक के अंको के सहारे चित्र बनाना सिखाया। बहुत आसान तरिके से उन्होंने अंक 1 से चेहरा, हाथी और 2 अंक से बतख और आंखे, अंक 3 से श्री गणेश और फ्लावर पॉट, 4 से छत्री, मछली, 5 से चीखता हुआ व्यक्ति, 6 से जोकर, 7 से ग्लास आईसक्रिम कोन, 8 से अंगूर और चीडियां, 9 से अंगूठा और 0 से संतरा सूर्य, घड़ी, सिक्का, आंखों की पुतलियां बनाना सिखाया। कार्टून शाला में मौजूद बच्चे बेहद आसान तरीके से चित्र बनाने की इस विधा से खासे रोमांचित हो गए। कार्टून शाला का शुभारंभ मौके पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने कहा कि कार्टून कला एक सुंदर विधा है। इसे विकसित करने का श्रेष्ठ समय बचपन ही है। इसी के लिए प्रेस क्लब का प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक बच्चे इसे सीखे।

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