भोपाल,भोपाल रेल मंडल ने ट्रेन के इंजन में कोहरे से लड़ने वाली फॉग सेफ डिवाइसें लगाने का काम लगभग पूरा कर लिया है। आने वाले दिनों में घने कोहरे के दौरान मंडल में ट्रेनों के पहिए नहीं थमेंगे, बल्कि ट्रेनें चलती रहेंगी। अब ट्रेनें घने कोहरे में रफ्तार कुछ कम हो सकती है लेकिन बीते सालों की तुलना में जल्दी स्टेशन पहुंचेगी। बता दें कि भारतीय रेल सभी ट्रेनों के इंजनों में एक डिवाइस लगा रहा है। यह डिवाइस लोको पायलट को ट्रेन में चढ़ने से पहले आवंटित होती है। लोको पायलट इनको लेकर ट्रेन के इंजन में चढ़ते हैं और भाषा सेलेक्ट करके ऑन कर देते हैं। ये डिवाइस सैटेलाइट आधारित होती है जो आने वाले सिग्नल की लोकेशन बता देती है। मतलब जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ती है उस अनुरूप यह डिवाइस लोको पायलट को बताती है कि कितने किलोमीटर पर सिग्नल आ रहा है। एक तरह से यह डिवाइस लोको पायलट को सिग्नल के आने से पहले अलर्ट मैसेज देती है। मैसेज मिलने के बाद लोको पायलट और सहायक लोको पायलट सतर्क हो जाते हैं और गंभीरता से सिग्नल में दिए जा रहे संकेतों की पहचान करने के लिए तैयार हो जाते हैं। भोपाल के एक लोको पायलट का कहना है कि जब यह डिवाइस नहीं रहती थी और कोहरा घना होता था तब पता नहीं चलता था कि सिग्नल कितनी दूर पर आने वाला है इसलिए मन में अनिश्चितता होती थी और ट्रेन की रफ्तार बहुत कम करके चलाना पड़ता था। इस तरह ट्रेनें तय समय से घंटों लेट हो जाती थी जब से डिवाइस लगाई है तब से हम निश्चित है क्योंकि दो से 10 किलोमीटर पहले ही सिग्नल की पोजीशन मिलती है और हम उसके संकेत को पढ़ लेते हैं उस अनुरूप ट्रेन चलाने में सहूलियत होती है रफ्तार भी कम नहीं करनी पड़ती है।यह महंगी डिवाइस हैं जो मूवेबल है इन्हें ड्यूटी खत्म होने के बाद लोको पायलट लोको लॉबी में जमा कराते हैं। इसी तरह लोको पायलट और सहायक लोको पायलट वॉकी टॉकी को भी जमा करते हैं। डिवाइस अंग्रेजी व हिंदी समेत कई भाषाओं का विकल्प दिया गया है। इसमें से भोपाल रेल मंडल के लोको पायलट, सहायक लोको पायलट हिंदी भाषा का उपयोग कर रहे हैं जब भी ये ट्रेनों में चढ़ते हैं तो डिवाइस को हिंदी भाषा पर सेट कर देते हैं।
घने कोहरे में भी ज्यादा लेट नहीं होगी ट्रेनें, इंजन में फॉग सेफ डिवाइस लगाने का काम पूरा