भोपाल,देशभर के 25 करोड़ से ज्यादा मजदूर एवं कामगार आज हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण बैंक, बीमा, डाक तार, केन्द्र, बीएसएनएल, कोयला, परिवहन, तेल, पोर्ट, विमानन एवं अन्य संस्थानों के कार्यालयों में कामकाज ठप्प रहा। संख्या की दृष्टि से यह विश्व की सबसे बड़ी हड़ताल है। यह हड़ताल मुख्य रूप से उन मुद्दों पर केंद्रित है जिनसे देश की जनता, हर ट्रेड यूनियन एवं कामगार प्रभावित होता है। हड़ताली संगठनों ने मुख्य रूप से 7 सूत्रीय माँगों को लेकर हड़ताल की है जो कि इस प्रकार है :-
(1) सभी गैर-आयकरदाता परिवारों के लिए प्रतिमाह रू. 7500/- का नगद हस्तांतरण करो, (2) सभी जरूरतमंदों को प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 10 किलो मुत राशन दो, (3) ग्रामीण क्षेत्रों में एक साल में 200 दिनों के काम को बढ़ाने के लिए मनरेगा का विस्तार करो तथा शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी सुनिश्चित करो (4) सभी किसान विरोधी कानूनों और मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लो (5) बैंक, बीमा समेत वित्तीय क्षेत्र की सार्वजनिक संस्थाओं के निजी करण को रोको, कोयला खदानों की नीलामी और रेलवे, आयुध कारखानों, बंदरगाह आदि जैसे सरकारी विनिर्माण उपक्रम और सेवा संस्थाओं के निगमीकरण को बंद करो (6) सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की समय से पहले सेवानिवृत्ति के क्रूरतापूर्ण सर्कुलर को वापस लो, (7) सभी को पेंशन प्रदान करो, नई पेंशन योजना (एनपीएस) को खत्म करो और पहले की पुरानी पेंशन योजना को बहाल करो- ईपीएस-95 में सुधार करो‘।
राजधानी भोपाल में बैंक, बीमा, केंद्र, डाक-तार, बीएसएनएल, इंटक, एटक, सीटू, एआईयूटीयूसी एवं अन्य संस्थानों की ट्रेड यूनियनों के कामगार एवं कर्मचारी रंग-बिरंगे बैनर, पोस्टर, प्ले कार्ड्स एवं कलरफुल ड्रेस के साथ आज प्रात: 11:00 बजे जहाँगीराबाद भोपाल स्थित नीलम पार्क में एकत्रित हुए। उन्होंने अपनी माँगों के समर्थन में नारेबाजी कर प्रभावी प्रदर्शन किया। इसके पश्चात एक सभा हुई, इस सभा को हड़ताली संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन के महासचिव वी.के. शर्मा ने बताया कि बैंकिंग उद्योग की यूनियनों ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों की 7 सूत्री माँगों का समर्थन करते हुए राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में भाग लिया। मध्यप्रदेश में 12 में से 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों एवं सहकारी बैंकों में हड़ताल के कारण कामकाज ठप्प रहा। बैंक अधिकारी- कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की कि- बैंकों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए, सरकारी क्षेत्र के बैंकों को मजबूत किया जाए, ऋण चूककर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए, कॉर्पोरेट घरानों के विशाल खराब ऋणों की वसूली की जावे, जमा राशियों पर ब्याज दर बढ़ाई जाए, बैंकों में आउटसोर्सिंग पर अबिलंब विराम दिया जावे, बैंकों में नई भर्ती की जावे, नई पेंशन स्कीम को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू की जावे, सहकारी बैंकों सहित अन्य बैंकों में महंगाई भत्ते से संबद्ध पेंशन योजना लागू की जावे, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को मजबूत किया जावे। उन्होंने केन्द्र सरकार को आगाह किया की माँगे ना माने जाने की स्थिति में आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा, जिसमें धरना, प्रदर्शन, सभाओं के अलावा राष्ट्रव्यापी हड़तालें भी शामिल है।