भोपाल, राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लगातार कर्ज ले रही है। प्रदेश सरकार वर्ष-2020 में अब तक 14 हजार 250 करोड़ रुपये उधार ले चुकी है। कोरोना संकट की वजह से प्रभावित प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस बार 13 साल के लिए एक हजार करोड़ रुपये लिए गए हैं। सूत्रों की माने तो दो लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज एक हजार करोड़ रुपये के नए कर्ज को मिलाकर प्रदेश के ऊपर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल कर्ज हो चुका है। 21 सितंबर से शुरू होने वाले राज्य विधानसभा के तीन दिनी सत्र में सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आर्थिक सर्वेक्षण में ऋण की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। कोरोना संकट से आय घटी इस बार कोरोना संकट की वजह से केंद्रीय और राज्य के करों से होने वाली आय में कमी आई है। इसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को अतिरिक्त ऋण लेने का विकल्प दिया है। इसको लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा कर चुके हैं। वित्त विभाग रणनीति बनाकर हर माह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के माध्यम से वित्तीय संस्थानों से ऋण ले रहा है।बता दें कि जुलाई और अगस्त में 2000-2000 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। सितंबर में अभी 1000 करोड़ रुपये लिए हैं। अभी तक लगभग 28 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान प्रदेश को हुआ है। केंद्र से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की क्षतिपूर्ति में मिलने वाली राशि भी 5900 करोड़ रुपये कम मिली है। राज्य को साढ़े 14 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज लेने की सशर्त अनुमति मिली है। सरकार इस वर्ष 40 हजार करोड़ रुपये तक कर्ज ले सकती है। मालूम हो कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के चलते प्रदेश की चौपट हो आर्थिक गतिविधियों को कर्ज लेकर राज्य सरकार पुन: पटरी पर लाने के प्रयास करेगी। राज्य सरकार ने इसी रणनीति के एक बार पुन: कर्ज लिया है।
मप्र सरकार ने लिया एक हजार करोड़ का कर्ज