दक्षिण-पश्चिम मप्र में कम दबाव का क्षेत्र हुआ सक्रिय,अब राजस्थान-गुजरात से सटे ‎जिलों में अच्छी बारिश का अनुमान

भोपाल, मध्यप्रदेश में बरसात का दौर शुरू हो गया है। कई जिलों में वर्तमान अच्छी बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। अगले कुछ दिनों तक झमाझम बरसात जारी रहने का अनुमान है। बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ा कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम मप्र में सक्रिय हो गया है। मानसून ट्रफ भी गुजरात से दक्षिण-पश्चिम मप्र पर बने सिस्टम से होकर छत्तीसगढ़ तक बना हुआ है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शुक्रवार को राजस्थान और गुजरात की सीमा से लगे मप्र के जिलों में अच्छी बरसात होने की संभावना है। उधर गुरुवार को सुबह 8.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक होशंगाबाद में 43, खरगोन में 16, धार में 12, सागर में 11, दमोह में 10, मंडला में 9, खजुराहो में 8, ग्वालियर में 3.2, भोपाल (शहर) में 2.1, नौगांव, उमरिया में 2 मिमी. बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में सक्रिय कम दबाव के क्षेत्र पर एक ऊपरी हवा का चक्रवात भी बना हुआ है। इस वजह से प्रदेश में बरसात हो रही है। पिछले 24 घंटों (बुधवार सुबह साढ़े आठ से गुरुवार सुबह साढ़े आठ तक) के दौरान होशंगाबाद में 114.5, छिंदवाड़ा में 62, रायसेन में 53.6, सिवनी में 45, मंडला में 42, खजुराहो में 32.8, पचमढ़ी में 28.4, टीकमगढ़ में 28, भोपाल शहर में 13.2 मिमी. भोपाल (एयरपोर्ट) में 4.1 मिमी. बरसात हुई। शुक्ला ने बताया की बंगाल की खाड़ी में बनकर आगे बढ़ा सिस्टम काफी तेज गति से चला है। साथ ही अब कुछ कमजोर पड़ गया है। उधर दक्षिण गुजरात पर बना ऊपरी हवा का चक्रवात भी कोंकण-गोवा की तरफ खिसक गया है। इससे भारी बरसात की संभावना कम हो गई है,लेकिन मानसून ट्रफ के सिस्टम के साथ संबद्ध होने से रुक-रुक कर बौछारें पड़ने का सिलसिला बना रहेगा। उधर 9 अगस्त को एक अन्य कम दबाव का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में बनने जा रहा है। उसके आगे बढ़ने पर प्रदेश में बरसात का एक और दौर शुरू होने के आसार हैं। अगस्त का महीना शुरू होते ही मध्य प्रदेश में अब धीरे-धीरे बारिश का मौसम शबाब पर आने लगा है। पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश से जहां किसानों की सूख रही फसलों में अब धीरे-धीरे हरा पन आने लगा है, वहीं आम लोगों को भी गर्मी और उमस से राहत मिलने लगी है। लोगों को उम्मीद है कि इस महीने अच्छी बारिश होगी, जिससे की आम लोगों को भी राहत मिलेगी। मालूम हो कि इस साल बारिश के मौसम के जून, जुलाई के महीने में बहुत ही कम बारिश हुई है। जून महीने में हुई बारिश के बाद कई किसानों ने अपने-अपने खेतों में सोयाबीन, उड़द, मूंग और धान की फसल की बोवनी कर दी थी लेकिन किसानों के द्वारा खेतों में की गई बोवनी के बाद से ही बारिश नहीं हुई थी। हालत यह बन गए हैं कि बारिश न होने से कई किसानों की सोयाबीन, उड़द, मूंग की फसल पीली पड़ने लगी थी। इतना ही नहीं इन फसलों में इल्ली और कचरे की बीमारी लगना शुरू हो गई थी। किसानों ने अपनी फसलों को बचाने के लिए दवा का छिड़काव किया, लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ।

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