भोपाल, मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार अब कमलनाथ सरकार के अंतिम छह माह के शासनकाल के दौरान लिए गये निर्णयों की समीक्षा नहीं कराएगी। सरकार ने समीक्षा के लिए बनाए गए मंत्रिसमूह को भंग कर दिया है। सरकार ने 20 मार्च, 2020 से छह माह पूर्व की अवधि में पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार के दौरान राज्य शासन द्वारा लिए गये निर्णयों की समीक्षा के लिए मंत्री समूह का गठन किया था। इस मंत्री समूह में गृह तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, जल-संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कमल पटेल शामिल थे। मंत्रिसमूह को किसान कर्जमाफी की भी समीक्षा करनी थी, मगर अब जो फैसला सरकार ने लिया है, उसमें माना जा रहा है कि यह योजना भी चालू रहेगी। बता दें कि
समिति ने तीन-चार बैठक करके विभिन्न विभागों से जुड़े निर्माण कार्यो की निविदा, कर्जमाफी सहित अन्य मुद्दों पर विचार किया था। पिछले साल की वेयर हाउस स्तर पर हुई गेहूं खरीदारी और कर्जमाफी को लेकर भी जानकारियां मांगी गई थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब अलग-अलग समितियां देखेंगी मामले
समिति के सामने संबल योजना में कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए बदलाव का मुद्दा भी सामने आया था। सूत्रों का कहना कि समिति के सामने जितने भी नीतिगत मामले आए थे, उन्हें मुख्यमंत्री को अवगत कराया जा चुका है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब विभिन्न मामलों को देखने के लिए अलग-अलग मंत्रिमंडलीय समितियां गठित हो गई हैं। ऐसे में अब एक समिति की जरूरत नहीं रह गई थी, इसलिए पिछली सरकार के फैसलों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही आर्थिक मामलों को देखने के लिए गठित समिति भी निरस्त कर दी गई है। इसे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ राजस्व बढ़ाने के उपाय सुझाने का जिम्मा दिया गया था। इसमें डॉ. मिश्रा के अलावा तत्कालीन खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और आदिम जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह को सदस्य बनाया था।
शिवराज सरकार ने भंग किया मंत्रिसमूह, मप्र में जारी रहेगी नाथ सरकार की कर्जमाफी योजना