रेड्डी ने संभाल लिया मुख्य सचिव का दायित्व, मोहंती हो सकते हैं विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष

भोपाल, प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने राजनीतिक संकट के बीच प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया एसआर मोहंती को हटाकर 1984 बैच के आईएएस गोपाल रेड्डी को मुख्य सचिव बनाया है। मोहंती को मंत्रालय के बाहर प्रशासनिक अकादमी का महानिदेशक बनाया है। वे 31 मार्च को रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के लिए भी आवेदन किया है। मुख्य सचिव से हटने के बाद अब उनका आयोग का अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य सचिव रहते मोहंती 31 मार्च से पहले नियामक आयोग के अध्यक्ष नहीं बन पाते, क्योंकि आयोग के अध्यक्ष के चयन की कमेटी में खुद मुख्य सचिव होते हैं। ऐसे में मुख्य सचिव रहते मोहंती इसका चयन नहीं कर पाते। अब मुख्य सचिव बनने के बाद गोपाल रेड्डी विद्युुत नियामक आयोग के अध्यक्ष के चयन के लिए बैठक बुला सकते हैं। चयन समिति में एक सदस्य भारत सरकार का प्रतिनिधि होता है और एक हाईकोर्ट का रिटायर्ड जज होता है। हालांकि नियामक आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए एक दर्जन से ज्यादा आवेदन आए हैं।
सियासी घमायान के बीच तबादले
प्रदेश में सत्ता को लेकर मचे संग्राम के बीच कमलनाथ सरकार लगातार प्रशासनिक स्तर पर बदलाव कर रही है। बीते 10 दिन में लगभग 100 अधिकारियों के तबादले किए जा चुके हैं। रविवार को ही गृह विभाग ने आईपीएस अफसर वीके जौहरी को दो साल के लिए पुलिस महानिदेशक बनाया है। इसी कड़ी में एक और बड़ा बदलाव करते हुए 1985 बैच के आईएएस अधिकारी एम. गोपाल रेड्डी को मुख्य सचिव बनाया गया है। सरकार ने उन्हें पांच मार्च को मुख्य सचिव कार्यालय में विशेष कत्र्तव्यस्थ अधिकारी बनाकर साफ कर दिया था कि उन्हें मुख्य सचिव बनाया जाएगा। मोहंती के प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के महानिदेशक का कार्यभार संभालने पर अपर मुख्य सचिव खेल एवं युवा कल्याण वीरा राणा इस अतिरिक्त दायित्व से मुक्त हो जाएंगी।

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