भोपाल, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अब एनपीआर को लेकर मोर्चा खोल दिया है, ओर उन्होने अपनी ही सरकार से मांग की है कि सरकार को एनपीआर को रिजेक्ट करना चाहिए, यदि सरकार ने इसे रिजेक्ट नही किया तो प्रदेशभर के लोगो द्वारा बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार विधायक आरिफ मसूद ने सोमवार को अपने निवास पर आयोजित पत्रकारवादार्ता में कहा कि एन.आर.सी. सीएए, एनपीआर को लेकर मध्यप्रदेश के सभी जिलों के प्रमुखों की बैठक भोपाल में आयोजित करने की तैयारियां की गई है, यह बैठक मे देश के कई बुद्धिजीवीयो के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ को मेमोरेंडम दिया जायेगा।अगर उसके बाद भी कोई सकारात्मक बात नहीं होती है, तो आगे का रुख तैयार किया जाएगा। एनपीआर को लेकर सीएम कमलनाथ से मिलकर सरकार से इसे रिजेक्ट करने की मांग करने के साथ ही इसे लेकर आगे की रणनीति भी तैयारी की जाएगी। विधायक आरिफ मसूद ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि मेरे द्वारा मध्य प्रदेश मे इसी सप्ताह से एक मुहिम चलाई जाएगी जिसमें प्रत्येक घर पर यह स्लोगन लिखवाने का आम जनता से अपील करेंगे की वह अपने घर के बाहर यह स्लोगन लिखवाए “हम कागज़ नहीं दिखाएंगे” नो एनआर सी, नो सीएए, नो एनपीआर इस क्लोगन की शुरूआत भोपाल से इसी सप्ताह से प्रारम्भ करने के लिए वार्डो ओर मोहल्लों में कमरा बैठकें करके लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही विधायक आरिफ मसूद ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनुरोध किया है, कि हर 10 साल में जो जनगणना की जाती है उससे प्रदेश के नागरिकों को कोई एतराज नहीं है, जिसमें जनगणना वाले आते थे, घर में कितने लोग हैं, पता करते थे, और चले जाते थे। विधायक ने आगे कहा कि लेकिन वर्तमान में मोदी सरकार जो संशोधित एनपीआर लाई है, यदि उसके आधार पर जनगणना की गई तो घर वालों से उनके साथ-साथ उनके बाप, दादा की जानकारी भी मॉगी जाएगी इस प्रकार जनगणना नहीं की जानी चाहिए। आरिफ मसूद पत्रकारों से चर्चा करते हुए आगे कहा कि जनसंख्या सेन्सस एक्ट और सीए 1955 में पापुलेशन रजिस्टर का कोई उल्लेख नहीं है, यह सीए रूल्स 2003 में एक और सेनेस 14 ए जोड़ दिया मूल एक्ट में इसे 2004 में लागू किया गया है, इसलिए यह गलत है। कांग्रेस विधायक ने आगे कहा कि क्योंकि रूल्स कानून लागू होने के बाद बनाए जा रहे हैं, घर और घरवालों की जानकारी मुख्य डेटा है, जो हमारे मूल अधिकारों का हनन हैं। उन्होने आगे कहा कि न्यायमूर्ति पुट्टस्वामी (सितंबर 2018 की 9 न्यायाधीशों की पीठ) एनपीआर 2020 का नोटिफिकेशन 31 जुलाई 2019 को डाटा प्राइवेसी जजमेंट के तहत किया गया ताकि तैयारी के लिए समय रहे लेकिन सीएए 10 जनवरी 2020 को अस्तित्व में आया जिसके बारे में अभी तक रूल्स नहीं बने हैं, इसलिए 2003 के रूल्स के मुताबिक एनपीआर असंवैधानिक है।
MP के कांग्रेस विधयाक आरिफ मसूद ने सीएम कमलनाथ से की एनपीआर को रिजेक्ट करने की मांग